Public Exam Amendment Bill: संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली पर लगाम लगाने के उद्देश्य से ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक’ पेश किया गया। हालांकि, विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा और मतदान नहीं हो सका।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी दलों का कहना था कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, वे किसी अन्य विषय पर चर्चा में हिस्सा नहीं लेंगे। लगातार बढ़ते शोर-शराबे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
हंगामे के बीच ही विधेयक को ध्वनि मत से सदन में पेश किया गया। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने “मोदी-शाह छात्रों से माफी मांगें” जैसे नारे लगाए। सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद पहली बार सदन स्थगित करना पड़ा।
विधेयक में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
लोकसभा सदस्यों को वितरित मसौदे के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक कराने, परीक्षा में संगठित नकल कराने या अन्य अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कड़े दंड का प्रस्ताव किया गया है।
दोषी पाए जाने पर कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद हो सकती है।
50 लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है।
सभी मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव है, जो आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करेंगी।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की तैयारी
सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स के गठन की भी घोषणा की है। इसका उद्देश्य पेपर लीक जैसी घटनाओं की रोकथाम और परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक सुधार सुनिश्चित करना है।
सरकार की विपक्ष से अपील
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि वह छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सार्थक चर्चा होने दे। उन्होंने कहा कि करोड़ों विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
फिलहाल, विधेयक लोकसभा में पेश हो चुका है, लेकिन इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा और अंतिम मंजूरी संसद की आगामी कार्यवाही में होगी।









