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IAS छोड़ने के बाद वापसी का रास्ता खुला या बंद? दिव्या मित्तल के इस्तीफे से फिर उठा बड़ा सवाल

On: September 1, 2026 10:37 AM
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नई दिल्ली। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के किसी अधिकारी के इस्तीफे और उसके बाद दोबारा सेवा में लौटने को लेकर नियम जितने स्पष्ट हैं, उनकी प्रशासनिक प्रक्रिया उतनी ही जटिल है। आम तौर पर इस्तीफा देने के बाद अधिकारी के पास फैसला बदलने की गुंजाइश रहती है, लेकिन यह मौका इस्तीफा स्वीकार होने तक ही रहता है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के मुताबिक, IAS अधिकारी का इस्तीफा तुरंत प्रभाव से स्वीकार नहीं हो जाता। इसे मंजूरी मिलने में कई स्तरों पर प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। इस दौरान यदि अधिकारी अपना निर्णय बदलता है, तो वह इस्तीफा वापस लेने के लिए आवेदन कर सकता है। लेकिन सरकार की ओर से इस्तीफा एक बार औपचारिक रूप से स्वीकार किए जाने के बाद उसकी वापसी का रास्ता बंद हो जाता है।

दिव्या मित्तल के इस्तीफे से फिर चर्चा में आया मुद्दा

यूपी कैडर की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल से जुड़े इस्तीफे के घटनाक्रम ने इस पुराने सवाल को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है कि आखिर कोई नौकरशाह इस्तीफा देने के बाद किस स्थिति में वापस सेवा में आ सकता है।

दरअसल, प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने और बाद में अपना फैसला बदलने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। कुछ मामलों में इस्तीफे लंबे समय तक सरकार के पास लंबित रहे, जबकि कुछ अधिकारियों ने मंजूरी से पहले ही अपना निर्णय बदल लिया।

अनीश शेखर ने इस्तीफा वापस लिया

तमिलनाडु कैडर के 2011 बैच के IAS अधिकारी अनीश शेखर का मामला इसका एक उदाहरण है। उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए फरवरी 2024 में इस्तीफा दिया था। हालांकि, उनका इस्तीफा स्वीकार होने से पहले ही उन्होंने अपना फैसला बदल लिया। मई 2024 में वह दोबारा IAS सेवा में लौट आए।

इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि इस्तीफा देने और उसके औपचारिक रूप से स्वीकार होने के बीच का समय अधिकारी के लिए महत्वपूर्ण होता है।

शाह फैसल ने भी बदला था फैसला

IAS से इस्तीफे और फिर सेवा में वापसी का सबसे चर्चित उदाहरण शाह फैसल का रहा है। UPSC सिविल सेवा परीक्षा में टॉप करने वाले शाह फैसल ने IAS से इस्तीफा देकर राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी भी बनाई।

हालांकि, उनका इस्तीफा तत्काल स्वीकार नहीं हुआ। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाई और करीब तीन साल बाद फिर से सरकारी सेवा में लौट आए। उनका मामला भी इस बात की मिसाल बना कि इस्तीफा लंबित रहने के दौरान परिस्थितियां बदलने पर अधिकारी के लिए वापसी की संभावना बनी रह सकती है।

इस्तीफा देकर राजनीति में जाने वाले अधिकारियों के मामले

All India Services के अधिकारियों पर लागू आचरण संबंधी नियम उन्हें सक्रिय राजनीति में भाग लेने या किसी राजनीतिक दल से जुड़ने से रोकते हैं। ऐसे में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का फैसला करने वाले अधिकारियों को आमतौर पर पहले सेवा से इस्तीफा देना पड़ता है।

लेकिन यहीं से कई मामलों में एक अलग तरह की प्रशासनिक स्थिति पैदा हो जाती है। अधिकारी इस्तीफा देकर राजनीति में चले जाते हैं, जबकि सरकार की ओर से उनके इस्तीफे को औपचारिक मंजूरी मिलने में लंबा समय लग सकता है।

कन्नन गोपीनाथन और शशिकांत सेंथिल के मामले

पूर्व IAS अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने 2019 में जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक बदलावों के विरोध में सेवा से इस्तीफा दिया था। बाद में वह राजनीति में सक्रिय हुए और कांग्रेस में शामिल हो गए। हालांकि, उनके इस्तीफे की औपचारिक स्वीकृति को लेकर लंबे समय तक स्थिति चर्चा में रही।

इसी तरह पूर्व IAS अधिकारी शशिकांत सेंथिल का मामला भी सुर्खियों में रहा। उनके इस्तीफे की प्रक्रिया में काफी समय लगा और इसी दौरान उन्होंने सक्रिय राजनीति का रुख किया। बाद में वह कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।

दौलत देसाई समेत कुछ अन्य अधिकारियों के मामलों में भी इस्तीफे की मंजूरी में देरी देखने को मिली है।

असली फर्क इस्तीफा देने और स्वीकार होने के बीच

IAS अधिकारी के इस्तीफे से जुड़े मामलों में सबसे अहम बात यह है कि सिर्फ इस्तीफा सौंप देना और उसका सरकार द्वारा स्वीकार किया जाना एक ही बात नहीं है।

जब तक इस्तीफा सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक कुछ परिस्थितियों में अधिकारी अपना फैसला बदलने की कोशिश कर सकता है। लेकिन स्वीकृति के बाद स्थिति पूरी तरह बदल जाती है और सेवा में वापसी का सामान्य प्रशासनिक रास्ता समाप्त हो जाता है।

यही वजह है कि IAS अधिकारियों के इस्तीफे से जुड़े मामलों में तारीख, इस्तीफे की स्थिति और उसकी स्वीकृति का आदेश बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

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