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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: सभी आठ आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल

On: June 30, 2026 9:27 AM
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Ram Temple Donation Theft Case: All Eight Accused Sent to 14-Day Judicial Custody

Ram Temple Donation Theft Case : अयोध्या के चर्चित राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Temple Donation Theft Case) मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत के न्यायाधीश रजत वर्मा ने पुलिस की न्यायिक अभिरक्षा की मांग को स्वीकार करते हुए आरोपियों को जेल भेज दिया। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की गई है।

मामले में आरोपियों को कानूनी स्तर पर भी बड़ा झटका लगा है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने फैसला किया है कि उसका कोई भी सदस्य इस मामले में आरोपियों की ओर से अदालत में पैरवी नहीं करेगा। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने बताया कि यदि कोई अधिवक्ता आरोपियों का वकालतनामा दाखिल करता है, तो उसे प्रत्येक आरोपी के लिए पांच लाख रुपये की सहयोग राशि संघ के पास जमा करनी होगी। उनके अनुसार इस राशि का उपयोग अभियोजन पक्ष की कानूनी प्रक्रिया में किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई बाहरी अधिवक्ता आरोपियों की पैरवी करता है, तो बार एसोसिएशन उसका विरोध करेगा। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि संबंधित अधिवक्ता सरकार, विश्व हिंदू परिषद या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से किसी प्रकार से संबद्ध है या नहीं। इस संबंध में बार एसोसिएशन की बैठक में प्रस्ताव भी पारित किया गया है।

अभियोजन पक्ष की सहायता के लिए लगभग 15 अधिवक्ताओं का एक विशेष पैनल गठित किया गया है। इसके अतिरिक्त 12 अन्य लोगों को भी जिम्मेदारी दी गई है, जो चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत करेंगे।

बार एसोसिएशन ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग दोहराई है। अध्यक्ष कालिका मिश्रा का कहना है कि यदि संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं होती है, तो अधिवक्ता संघ अदालत का दरवाजा खटखटाएगा। साथ ही चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के अयोध्या छोड़ने पर रोक लगाने की मांग भी की जाएगी।

उन्होंने बताया कि इस प्रकरण से जुड़ी कुछ याचिकाएं इलाहाबाद हाई कोर्ट में विचाराधीन हैं। यदि अदालत सीबीआई जांच के आदेश नहीं देती है, तो बार एसोसिएशन आगे भी उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई जांच से बचने के उद्देश्य से सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

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