नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) में 2026-27 सत्र के स्पॉट एडमिशन को लेकर छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। छात्रों ने प्रवेश प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई प्रवेश प्रक्रिया को लेकर नहीं, बल्कि बिना अनुमति प्रदर्शन करने और विश्वविद्यालय के कामकाज में बाधा डालने के कारण की गई है।
स्पॉट एडमिशन में मेरिट को लेकर उठे सवाल
विवाद की शुरुआत 2026-27 के स्पॉट एडमिशन को लेकर हुई। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि कुछ मामलों में बेहतर रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को दाखिला नहीं मिला, जबकि उनसे कम रैंक या मेरिट वाले छात्रों को प्रवेश दिया गया।
छात्रों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार के प्रदर्शन और चयन के आधार को स्पष्ट किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पॉट एडमिशन से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।
चार छात्रों पर निलंबन की कार्रवाई
विवाद के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने चार छात्रों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। आरोप है कि इन छात्रों ने बिना पूर्व अनुमति सेंट्रल कैंटीन में धरना दिया और विश्वविद्यालय के सामान्य कामकाज को प्रभावित किया।
प्रशासन की कार्रवाई के तहत छात्रों को अलग-अलग अवधि के लिए, करीब तीन से दस दिनों तक, कैंपस में प्रवेश से प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन छात्रों का दाखिला रद्द नहीं किया गया है।
प्रशासन ने कहा—प्रदर्शन के लिए तय है गेट नंबर 18
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान और नियमों का पालन करना चाहिए। प्रशासन के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए गेट नंबर 18 निर्धारित किया गया है और सेंट्रल कैंटीन में धरना देने से शैक्षणिक तथा प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
प्रशासन ने प्रवेश प्रक्रिया में धांधली या अनियमितता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का आधार प्रदर्शन का स्थान और विश्वविद्यालय के कामकाज में कथित व्यवधान है।
NSUI और SFI ने उठाई पारदर्शिता की मांग
मामले में छात्र संगठनों NSUI और SFI ने भी हस्तक्षेप किया है। संगठनों ने निलंबित छात्रों की कार्रवाई तत्काल वापस लेने की मांग की है।
इसके साथ ही संगठनों ने प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित छात्रों के स्कोरकार्ड सार्वजनिक करने की मांग रखी है। उनका तर्क है कि यदि चयन प्रक्रिया और प्राप्त अंकों की जानकारी सामने आती है, तो छात्रों के आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
विवाद के बीच अब सबकी नजर विश्वविद्यालय के अगले कदम पर
स्पॉट एडमिशन को लेकर उठे सवालों और छात्रों पर हुई कार्रवाई ने विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल छात्र संगठन अपने आरोपों और मांगों पर कायम हैं, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन अनियमितता के आरोपों को खारिज कर रहा है।
अब यह देखना अहम होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की ओर से मांगे गए स्कोरकार्ड और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े विवरणों को सार्वजनिक करता है या नहीं। इससे विवाद के केंद्र में मौजूद मेरिट और चयन प्रक्रिया को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।










