नई दिल्ली। सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव की दिशा में भारत ने 2026 में HPV टीकाकरण को बड़े स्तर पर शुरू किया है। HPV यानी Human Papillomavirus एक बेहद आम वायरस है। इसके कुछ प्रकार आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर समेत दूसरे HPV-संबंधी कैंसर का कारण बन सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक सर्वाइकल कैंसर के 95 प्रतिशत से अधिक मामले HPV संक्रमण से जुड़े हैं।
HPV वैक्सीन क्यों जरूरी है?
HPV वैक्सीन का मुख्य उद्देश्य HPV के उन प्रकारों से बचाव करना है, जो कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। टीका संक्रमण होने से पहले दिया जाए तो इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलता है। WHO लड़कियों के लिए 9 से 14 वर्ष की उम्र को प्राथमिक टीकाकरण समूह मानता है।
यह बात भी समझना जरूरी है कि HPV वैक्सीन इलाज नहीं, बल्कि बचाव का टीका है। अगर किसी व्यक्ति को पहले से HPV संक्रमण है, तो वैक्सीन उस संक्रमण को खत्म करने की दवा नहीं है।
भारत में किसे मुफ्त HPV वैक्सीन दी जा रही है?
भारत सरकार ने 28 फरवरी 2026 से देशभर में 14 वर्ष की पात्र लड़कियों के लिए राष्ट्रीय HPV टीकाकरण अभियान शुरू किया। अभियान का लक्ष्य लगभग 1.2 करोड़ लड़कियों को कवर करना है।
सरकारी अभियान में एक डोज Gardasil-4 मुफ्त दी जा रही है। टीका सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
टीका लगवाने का पूरा प्रोसेस क्या है?
सबसे पहले पात्रता की जांच की जाती है। इसके बाद अभिभावक की सहमति और टीकाकरण के लिए आवश्यक पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाती है। सरकार के अनुसार HPV टीकाकरण स्वैच्छिक है और अभिभावकीय सहमति आवश्यक है। पंजीकरण U-WIN प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी किया जा सकता है।
इसके बाद:
- पात्रता जांच: लड़की की उम्र और पहले लिए गए HPV टीके की जानकारी देखी जाती है।
- स्वास्थ्य की जांच : अगर बच्ची को उस समय मध्यम या गंभीर बीमारी है, तो ठीक होने तक टीकाकरण टाला जा सकता है।
- सहमति : अभिभावक की सहमति के बाद टीकाकरण किया जाता है।
- टीका लगाया जाता है: प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी HPV वैक्सीन की निर्धारित डोज देते हैं।
- टीकाकरण के बाद निगरानी:
टीका लगने के बाद कुछ समय स्वास्थ्यकर्मी की निगरानी में रखा जा सकता है, ताकि किसी तत्काल प्रतिकूल प्रतिक्रिया की स्थिति में आवश्यक सहायता दी जा सके। - रिकॉर्ड अपडेट : टीकाकरण की जानकारी संबंधित स्वास्थ्य रिकॉर्ड/U-WIN प्रणाली में दर्ज की जाती है।
कहां लग रही है HPV वैक्सीन?
सरकारी अभियान के तहत वैक्सीन आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), उप-जिला अस्पताल, जिला अस्पताल और सरकारी मेडिकल कॉलेज/अस्पतालों में उपलब्ध कराई जा रही है।
किन मामलों में टीका नहीं लगाया जाता?
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार मध्यम या गंभीर बीमारी की स्थिति में ठीक होने तक टीकाकरण टाला जाता है। पिछली वैक्सीन से गंभीर एलर्जी, यीस्ट से ज्ञात एलर्जी, गर्भावस्था और निर्धारित आयु-समूह से बाहर होने जैसी स्थितियों में भी अभियान के तहत टीकाकरण नहीं किया जाता। पहले से HPV वैक्सीन लगवा चुकी लड़कियों का रिकॉर्ड भी अपडेट किया जाता है।
क्या HPV वैक्सीन सुरक्षित है?
HPV वैक्सीन लंबे समय से कई देशों में इस्तेमाल हो रही है और WHO इसके उपयोग की सिफारिश करता है। भारत के राष्ट्रीय अभियान में भी टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटनाओं यानी AEFI (Adverse Events Following Immunization) की निगरानी की व्यवस्था रखी गई है।
फिर भी हर वैक्सीन की तरह HPV टीके के बाद कुछ लोगों में हल्का दर्द, इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन या बुखार जैसे सामान्य प्रभाव हो सकते हैं। किसी गंभीर या असामान्य लक्षण की स्थिति में तुरंत स्वास्थ्यकर्मी से संपर्क करना चाहिए।
एक डोज या दो डोज—कन्फ्यूजन क्यों?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। भारत के 2026 के सरकारी अभियान में पात्र 14 वर्षीय लड़कियों के लिए Gardasil-4 की एक डोज दी जा रही है।
वहीं WHO की सामान्य सिफारिशों में HPV वैक्सीन के लिए उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर एक या दो डोज का विकल्प मौजूद है। इसलिए किसी निजी अस्पताल या दूसरे देश की वैक्सीनेशन सलाह को सीधे भारत के सरकारी अभियान पर लागू नहीं करना चाहिए। व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण है।
टीका लगने के बाद भी सावधानी जरूरी
HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन यह सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग का विकल्प नहीं है। WHO के अनुसार उम्र के अनुसार नियमित स्क्रीनिंग और समय पर इलाज भी जरूरी है।
भारत सरकार भी HPV टीकाकरण के साथ सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग, शुरुआती जांच और उपचार पर जोर दे रही है। 15 जुलाई 2026 तक देश में 52,10,302 लड़कियों को HPV वैक्सीन लगाई जा चुकी थी।
सबसे जरूरी बात
HPV वैक्सीन को लेकर अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या योग्य डॉक्टर से जानकारी लेना बेहतर है। किस उम्र में कौन-सी डोज लगेगी, किसे नहीं लगानी चाहिए और आगे की जरूरत क्या है—इन सवालों का अंतिम निर्णय स्वास्थ्यकर्मी की सलाह और संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों के आधार पर होना चाहिए।
Note: यह लेख सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से है। व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह के लिए डॉक्टर या सरकारी स्वास्थ्यकर्मी से संपर्क करें।











