फर्रुखाबाद। 13 जून 2026 को मोटरसाइकिल चोरी होने के बाद वाहन स्वामी ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद 27 अगस्त तक न तो मामले में FIR दर्ज की गई और न ही पुलिस की ओर से वाहन स्वामी को किसी कार्रवाई की सूचना दी गई।
करीब 75 दिन बाद वाहन स्वामी को बाहरी लोगों के माध्यम से जानकारी मिली कि उसकी चोरी हुई मोटरसाइकिल थाने के अंदर खड़ी है। जानकारी मिलने के बाद जब वह थाने पहुंचा तो अपनी बाइक को थाने परिसर में खड़ा देखकर वह हैरान रह गया।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पुलिस के पास चोरी की बाइक पहुंच चुकी थी तो वाहन स्वामी को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई? शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की, इसकी जानकारी भी वाहन स्वामी को क्यों नहीं दी गई?
शिकायत के बाद भी FIR और कार्रवाई पर सवाल
वाहन स्वामी के अनुसार, उसने बाइक चोरी होने की शिकायत पुलिस से की थी, लेकिन अभी तक उसे FIR दर्ज होने की कोई जानकारी नहीं दी गई। यदि चोरी के मामले में FIR दर्ज नहीं हुई है तो इसकी वजह क्या है और यदि FIR दर्ज हुई है तो उसकी जानकारी वाहन स्वामी को क्यों नहीं दी गई—यह सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
बाइक थाने तक पहुंची कैसे?
अब यह भी जांच का विषय है कि चोरी हुई मोटरसाइकिल थाने तक कैसे पहुंची, उसे कब बरामद किया गया और किस व्यक्ति के कब्जे से बरामद किया गया। यदि बाइक किसी व्यक्ति से बरामद हुई थी तो उससे पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई क्या की गई?
गुप्त सूत्रों के अनुसार, बाइक की मरम्मत कराने वाले एक व्यक्ति से पुलिस ने पूछताछ की और बाद में उसे छोड़ दिया गया। हालांकि इस जानकारी की पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
75 दिन तक मालिक को क्यों नहीं मिली जानकारी?
मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि 13 जून को शिकायत के बाद 27 अगस्त तक वाहन स्वामी को पुलिस की ओर से कोई सूचना क्यों नहीं मिली? अगर बाइक पुलिस के कब्जे में पहले ही आ गई थी, तो वाहन स्वामी को इसकी जानकारी देने में इतनी देरी क्यों हुई?
अब वाहन स्वामी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की जांच और चोरी की शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग कर सकता है।
इस मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि बाइक कब बरामद हुई, FIR की स्थिति क्या है और अब तक क्या कार्रवाई की गई है।








