कोलकाता, पश्चिम बंगाल। राज्य में भाजपा सरकार के गठन के तीन सप्ताह बाद मुख्यमंत्री Shubhendu Adhikari ने अपने मंत्रिमंडल का पहला बड़ा विस्तार किया। राजधानी Kolkata स्थित Nabanna में आयोजित समारोह में भाजपा के 35 विधायकों को मंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। राज्यपाल R. N. Ravi ने सभी नए मंत्रियों को शपथ ग्रहण कराई।
इस विस्तार के साथ राज्य मंत्रिपरिषद की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है। इससे पहले मुख्यमंत्री और उनके पांच कैबिनेट सहयोगी शपथ ले चुके थे। सरकार का दावा है कि नए मंत्रिमंडल के गठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
भाजपा सरकार के प्रारंभिक मंत्रिमंडल में महिलाओं, मतुआ, राजबंशी और आदिवासी समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया था। इनमें Agnimitra Paul, Ashok Kirtania, Nisith Pramanik और Kshudiram Tudu जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। मंत्रिमंडल विस्तार के माध्यम से अब अन्य सामाजिक समूहों और क्षेत्रों को भी प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि नई मंत्रिपरिषद राज्य के विभिन्न सामाजिक वर्गों और भौगोलिक क्षेत्रों की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करेगी। पार्टी का मानना है कि व्यापक प्रतिनिधित्व प्रशासनिक कार्यों में गति लाने और विकास योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सहायक होगा।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 44 हो सकती है। 35 नए मंत्रियों के शामिल होने के बाद भी मंत्रिपरिषद में तीन पद रिक्त हैं, जिन्हें भविष्य में भरा जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मंत्रिमंडल विस्तार भाजपा के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। राज्य में ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक समूहों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं, विपक्षी दल भी नए मंत्रिमंडल के प्रदर्शन पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि सरकार को आने वाले समय में विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा।










