नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली के सावदा जेजे कॉलोनी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद इरफान से उनके घर जाकर मुलाकात की। बातचीत के दौरान इरफान ने मजदूरों, शिक्षा, बेरोजगारी और सामाजिक समस्याओं से जुड़े कई मुद्दे राहुल गांधी के सामने रखे। मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने अपनी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से भी इरफान की फोन पर बातचीत कराई।
वादे पूरे नहीं हुए तो करेंगे विरोध
इरफान ने बताया कि उन्होंने राहुल गांधी से साफ शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में उन्हें सत्ता मिली और उन्होंने आम लोगों से किए वादे पूरे नहीं किए, तो वे उनका भी विरोध करेंगे। उनका कहना था कि लोकतंत्र में जनता का अधिकार है कि वह हर सरकार से जवाब मांगे, चाहे वह किसी भी दल की हो।
उनके अनुसार, देश की प्रगति का लाभ समाज के हर वर्ग, विशेषकर मजदूरों और गरीबों तक पहुंचना चाहिए।
मजदूरों और बच्चों की समस्याएं उठाईं
इरफान ने कहा कि मुलाकात के दौरान उन्होंने दिहाड़ी मजदूरों की कठिनाइयों, बच्चों के स्कूल छोड़ने की बढ़ती समस्या और गरीब परिवारों की परेशानियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने उनकी बातें ध्यान से सुनीं और बीच में बहुत कम हस्तक्षेप किया।
प्रियंका गांधी से हुई हल्की-फुल्की बातचीत
फोन पर हुई बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी ने मजाकिया अंदाज में इरफान से कहा कि वे राहुल गांधी को शादी के लिए समझाएं, क्योंकि वह उनकी बात नहीं मानते। इस पर इरफान ने हंसते हुए जवाब दिया कि वे चाहते हैं राहुल गांधी भी उनकी तरह अविवाहित रहें। बातचीत का यह हिस्सा हल्के-फुल्के माहौल में हुआ।
शादी न करने का फैसला
इरफान ने बताया कि उन्होंने वर्षों पहले विवाह न करने का निर्णय लिया था। उनका कहना है कि पिछले करीब 15 वर्षों से वे विभिन्न सामाजिक आंदोलनों और धरनों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने अपने छोटे भाई की शादी कराई, लेकिन स्वयं अविवाहित रहने का रास्ता चुना।
उन्होंने स्वीकार किया कि उनके इस फैसले को धार्मिक दृष्टि से अलग तरह से देखा जा सकता है, लेकिन उन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा और जनहित के कार्यों के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया।
बिना औपचारिक शिक्षा के हासिल किया ज्ञान
इरफान ने बताया कि उन्होंने नियमित स्कूली शिक्षा नहीं ली। वे मोबाइल पर वॉइस सर्च और इंटरनेट की मदद से विभिन्न विषयों की जानकारी जुटाते हैं। अंग्रेजी लिखना-पढ़ना नहीं जानते, लेकिन लगातार सीखने की कोशिश करते रहते हैं।
राहुल गांधी ने भी उनसे पूछा कि बिना औपचारिक शिक्षा के उन्होंने इतना ज्ञान कैसे अर्जित किया। इस पर इरफान ने कहा कि जब किसी उद्देश्य के प्रति सच्ची लगन हो, तो सीखने के रास्ते अपने आप खुलते जाते हैं।
इलाके में नशे की समस्या पर चिंता
इरफान ने बताया कि उनके क्षेत्र में नशाखोरी एक गंभीर समस्या रही है और कई युवा इसकी चपेट में आए हैं। उनका दावा है कि मीडिया में इस मुद्दे के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं।
आर्थिक मदद लेने से किया इनकार
इरफान ने यह भी बताया कि एक पूर्व वायुसेना अधिकारी ने उनकी बहन की शादी के लिए सोने के कंगन देने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया। उनका कहना था कि उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक सहायता लेने में संकोच होता है, क्योंकि बाद में उस पर गलत आरोप लगाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका बैंक खाता नहीं है।
कविता और शायरी के जरिए रखी बात
बातचीत के दौरान इरफान ने हिंदी के प्रसिद्ध कवि गोपालदास ‘नीरज’ की चर्चित कविता “कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे” की पंक्तियां सुनाईं। इसके अलावा उन्होंने इंसानियत, न्याय और सामाजिक सरोकारों पर आधारित एक प्रसिद्ध शायरी भी साझा की।
मीडिया की भूमिका पर क्या बोले?
इरफान ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, पत्रकारिता को गरीबों और वंचित वर्ग की आवाज़ बनना चाहिए तथा शासन-प्रशासन से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाना चाहिए। उनका मानना है कि देश में उनके जैसे कई लोग हैं, जिनकी समस्याएं मुख्यधारा तक पहुंचने की जरूरत है।










