बिलंदपुर। बिलंदपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति, भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव और उनकी विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण श्रवण किया। नैमिषारण्य से पधारे कथा व्यास पंडित आशुतोष मिश्र ने अपनी सरस एवं मधुर वाणी से कथा का ऐसा रसपान कराया कि श्रद्धालु भक्ति में सराबोर हो गए।
कथा व्यास ने भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए कहा कि सच्चे भक्त के मार्ग में कठिनाइयाँ अवश्य आती हैं, लेकिन जो व्यक्ति बिना विचलित हुए प्रभु भक्ति और अपने लक्ष्य पर अडिग रहता है, उसे अंततः भगवान की कृपा और प्राप्ति अवश्य होती है।
भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने “ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैजनियाँ” भजन प्रस्तुत किया, जिस पर श्रद्धालु झूम उठे। उन्होंने बताया कि जब महर्षि विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को राजा दशरथ से मांगने पहुंचे, तब दशरथ का वात्सल्य देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो गए। गुरु वशिष्ठ की आज्ञा के बाद दोनों राजकुमार विश्वामित्र के साथ गए और राक्षसों का संहार कर यज्ञ को सफल बनाया।

कथा के दौरान अहिल्या उद्धार, धनुष यज्ञ, श्रीराम-विवाह, वनगमन, महाराज दशरथ का निधन, केवट संवाद, चित्रकूट प्रवास तथा रावण वध तक की लीलाओं का विस्तृत एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया।
कथा के अंत में व्यास जी ने कहा कि मनुष्य चाहे कोई भी कार्य करे, उसे हर समय भगवान का स्मरण और भजन करते रहना चाहिए। इसके बाद “हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे” महामंत्र के संकीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया।
इस अवसर पर परीक्षित शीलेन्द्र सिंह पाल एवं उनकी पत्नी रिमान देवी का आचार्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं “हे राजा राम तेरी आरती उतारूं” भजन के साथ पूजन कराया।
कार्यक्रम में पूर्व प्रधान जगपाल सिंह, प्रधान प्रतिनिधि रक्षपाल सिंह पाल, भरत पाल सिंह, सत्यपाल सिंह, दीपेंद्र सिंह, रामवीर बाथम, रामप्रताप सिंह, अवनीश कुमार पाल, सुधीर कुमार पाल सहित बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिला श्रद्धालु उपस्थित रहे।










