पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी राजनीतिक घमासान अब सड़क से संसद तक तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर बहस के लिए तैयार होती, तो विपक्ष की पहली मांग पर ही संसद में चर्चा की अनुमति दे दी जाती।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के उस आरोप को खारिज करते हुए कि विपक्ष चर्चा से बच रहा है, खरगे ने कहा कि सरकार की नीयत साफ नहीं थी। उन्होंने दोहराया कि विपक्ष अपनी मांग पर कायम है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पीछे नहीं हटेगा।
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर खरगे का हमला
मीडिया से बातचीत में मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में चर्चा चाहती थी, तो जिस दिन विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाया था, उसी दिन सदन में बहस शुरू हो जानी चाहिए थी।
खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले चर्चा से इनकार किया और बाद में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सांसदों के लिए संसद के मुख्य द्वार को बंद करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शर्मनाक है।
उन्होंने प्रधानमंत्री की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में पैदा हुई इस स्थिति के लिए सरकार की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। खरगे ने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष छात्रों के आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहा है और सही मुद्दों पर चर्चा से बच रहा है।
नियम 267 के तहत चर्चा की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष संसद में नियम 267 के तहत पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा चाहता था, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि चर्चा कराने के बजाय विपक्षी नेताओं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया।
खरगे ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार नहीं होगा।
प्रियांक खरगे ने सरकार से पूछा- छात्रों से ज्यादा मंत्री क्यों महत्वपूर्ण?
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने शिक्षा मंत्री को पद से हटाने से इनकार किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार लाखों छात्रों के भविष्य की चिंता करने के बजाय एक मंत्री को बचाने में क्यों लगी है।
उन्होंने पूछा कि आखिर धर्मेंद्र प्रधान सरकार के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं कि छात्रों की परेशानियों के बावजूद उन्हें पद से हटाने पर विचार नहीं किया जा रहा।
प्रियांक खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि क्या शिक्षा मंत्री के पास ऐसी कोई जानकारी है, जिसके कारण वे सरकार के लिए अपरिहार्य बन गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों जैसे ‘मन की बात’ और ‘परीक्षा पे चर्चा’ का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को छात्रों से सीधे संवाद करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के पास आयोजनों के लिए समय है, लेकिन वास्तविक समस्याओं से जूझ रहे छात्रों की बात सुनने का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज सुने बिना देश के भविष्य की योजनाएं बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है।










