Shiv Sena (UBT) के Loksabha में नौ में से छह सांसदों के Shiv Sena में शामिल हो जाने से महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। यह घटनाक्रम उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde की मौजूदगी में सोमवार को सामने आया।
पार्टी में शामिल होने वाले सांसदों में संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश आष्टीकर शामिल हैं। इन सांसदों के शिंदे गुट में जाने के बाद Uddhav Thackeray की पार्टी की लोकसभा में संख्या घटकर और कमजोर हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, इस टूट के संकेत पिछले कुछ दिनों से ही मिलने लगे थे। 17 जून को पार्टी प्रमुख Anil Desai ने सभी सांसदों की बैठक बुलाई थी, लेकिन उसमें केवल कुछ ही सांसद शामिल हुए थे। बैठक में Sanjay Raut, अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे मौजूद थे, जबकि बाकी कई सांसद अनुपस्थित रहे थे।
इसके बाद अनुपस्थित रहे छह लोकसभा सांसदों के शिंदे गुट में जाने की अटकलें तेज हो गई थीं। सोमवार को उनकी औपचारिक एंट्री के साथ यह अटकलें सच साबित हुईं।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक नहीं बल्कि क्षेत्रीय विकास से जुड़ा फैसला बताया। उन्होंने कहा कि ये सभी सांसद अपने-अपने क्षेत्रों के विकास के लिए उनके साथ आए हैं, न कि किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए। शिंदे ने यह भी दावा किया कि 2022 के राजनीतिक बदलाव के बाद जनता ने उनके फैसले को स्वीकार किया और चुनावों में उनकी ताकत बढ़ी।
शिंदे ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह खुद को एक कार्यकर्ता की तरह देखते हैं और नए शामिल हुए सांसदों को भी इसी तरह काम करने की सलाह दी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को “ऑपरेशन टाइगर” की सफलता बताया, जिसे शिवसेना (शिंदे गुट) ने उद्धव ठाकरे गुट से नेताओं और जनप्रतिनिधियों को अपने पक्ष में लाने के अभियान के रूप में देखा जाता है।
दूसरी ओर, Uddhav Thackeray ने इस पूरे घटनाक्रम को “गंदी राजनीति” करार दिया था। उन्होंने पहले भी पार्टी में संभावित टूट और दबाव की राजनीति को लेकर नाराज़गी जताई थी।
इस बीच, हाल के दिनों में उद्धव ठाकरे ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भावुक होकर कहा था कि यदि पार्टी के भीतर ही नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं तो वह अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय आया जब पार्टी में आंतरिक असंतोष और टूट की चर्चा तेज थी।
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन एक बार फिर बदलता दिख रहा है, और आने वाले दिनों में इसके और राजनीतिक प्रभाव देखने की संभावना है।












