लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया क्षेत्र में कोचिंग एवं एनिमेशन सेंटर की इमारत में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। हादसे में 15 छात्रों की मौत और कई लोगों के घायल होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही प्रदेशभर में कोचिंग संस्थानों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य व्यावसायिक भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग बेसमेंट या ग्राउंड फ्लोर स्थित पेट शॉप क्लिनिक में एसी के शॉर्ट सर्किट से लगी हो सकती है। आग तेजी से पूरी इमारत में फैल गई। इमारत में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने के कारण कई छात्र अंदर फंस गए। राहत एवं बचाव अभियान पूरा हो चुका है और प्रशासन ने पुष्टि की है कि अब इमारत के भीतर कोई व्यक्ति फंसा नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस मामले में लापरवाही के आरोपों के चलते चार अधिकारियों को निलंबित किए जाने की तैयारी है। इनमें जानकीपुरम क्षेत्र के कलेक्शन अधिकारी गौरव कुमार, इंदिरानगर के फायर स्टेशन सेफ्टी ऑफिसर (FSSO) कमलेन्द्र कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सहायक अभियंता (AE) अनिल कुमार तथा कनिष्ठ अभियंता (JE) प्रमोद पांडे के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों के कई अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार यह इमारत वर्ष 2014 में रिहायशी से व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तित की गई थी। बेसमेंट, ग्राउंड और प्रथम तल पर पेट शॉप संचालित थी, जबकि ऊपरी मंजिलों पर लाइब्रेरी, कोचिंग सेंटर और एनिमेशन स्टूडियो चल रहे थे।
इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में फायर सेफ्टी मानकों को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। विभिन्न जिलों में पुलिस, प्रशासन और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीमें कोचिंग सेंटरों तथा अन्य सार्वजनिक संस्थानों का निरीक्षण कर रही हैं। सरकार का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।







