समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। आयकर विभाग ने ट्रस्ट को आयकर अधिनियम की धारा 12AA और 12AB के तहत विस्तृत नोटिस जारी करते हुए 23 जून को सुनवाई के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
करीब 37 पन्नों के नोटिस में विभाग ने ट्रस्ट की गतिविधियों, वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए हैं। विभाग का कहना है कि ट्रस्ट की कुछ गतिविधियां उसके घोषित उद्देश्यों से मेल नहीं खातीं, इसलिए इन बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब और दस्तावेजी प्रमाण मांगे गए हैं।
नोटिस में जौहर यूनिवर्सिटी के लिए अधिग्रहित भूमि का भी उल्लेख किया गया है। आयकर विभाग ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्ष 2021 के फैसले का हवाला देते हुए भूमि आवंटन की शर्तों के पालन, भूमि के उपयोग और निर्धारित नियमों के अनुपालन पर स्पष्टीकरण मांगा है।
साथ ही वार्षिक रिपोर्ट और सार्वजनिक हित से जुड़े दायित्वों के पालन पर भी सवाल उठाए गए हैं।
इसके अलावा ट्रस्ट परिसर में मस्जिद निर्माण से संबंधित जानकारी और उपलब्ध रिकॉर्ड के बीच कथित अंतर का जिक्र करते हुए विभाग ने इस मामले में भी जवाब मांगा है।
आयकर विभाग ने ट्रस्ट के संचालन ढांचे पर भी सवाल उठाए हैं। नोटिस में कुछ जांच रिपोर्टों और बयानों का हवाला देते हुए आरोपों की जांच का उल्लेख किया गया है कि ट्रस्ट का संचालन मुख्य रूप से आजम खान और उनके परिवार के नियंत्रण में है तथा कुछ ट्रस्टियों की भूमिका केवल औपचारिक हो सकती है।
विभाग ने निर्माण कार्यों, कथित अघोषित निवेश, सरकारी धन के उपयोग और फंड डायवर्जन जैसे मुद्दों पर भी ट्रस्ट से विस्तृत दस्तावेजी जवाब देने को कहा है।
23 जून को सुबह 11:30 बजे सुनवाई निर्धारित की गई है। आयकर विभाग ने ट्रस्ट के अधिकृत प्रतिनिधि को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
यदि विभाग ट्रस्ट के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है, तो उसके आयकर पंजीकरण को रद्द करने की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।







