हसेरन, कन्नौज। हसेरन में 85 वर्षों से अधिक समय से संचालित हो रही ऐतिहासिक रामलीला के अंतिम दिन रावण दहन का आयोजन किया गया। इस दौरान भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए रोमांचक युद्ध को देखने के लिए भारी संख्या में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की भीड़ उमड़ी। रावण दहन के साथ ही पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
रामलीला में भगवान श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध का सजीव मंचन किया गया। दोनों महारथियों के बीच हुए रोमांचक मुकाबले ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। युद्ध के दौरान जब विभीषण ने भगवान श्रीराम को रावण की मृत्यु का रहस्य बताया, तो रावण ने विभीषण पर प्राणघातक वज्र शक्ति से प्रहार किया। भगवान श्रीराम ने विभीषण की रक्षा करते हुए उस प्रहार को स्वयं अपने ऊपर ले लिया।
इसके बाद विभीषण ने भगवान श्रीराम को बताया कि रावण की नाभि में अमृत है और उसका वध करने के लिए एक साथ 31 बाणों का प्रयोग करना होगा। विभीषण की सलाह पर भगवान श्रीराम ने 31 बाणों से रावण पर प्रहार किया, जिससे रावण धराशायी हो गया। रावण के वध के साथ ही देवताओं द्वारा पुष्प वर्षा का दृश्य प्रस्तुत किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
रामलीला के साथ आयोजित मेले में भी लोगों ने जमकर आनंद उठाया। बच्चों ने झूलों का लुत्फ उठाया, जबकि महिलाओं ने मेले में खरीदारी की। वहीं, बच्चों और अन्य लोगों ने जलेबी, टिक्की, समोसे सहित विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संरक्षक सुशील दुबे, अध्यक्ष शिवम भदौरिया, महावीर गुप्ता और रामलीला कमेटी के सभी सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा। मेले के दौरान पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था भी सराहनीय रही, जिसके चलते आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस प्रकार हसेरन की वर्षों पुरानी रामलीला का समापन धार्मिक उत्साह और उल्लास के साथ हुआ।





