सौरिख। बारह रबीउल अव्वल के मौके पर बुधवार को सौरिख कस्बे में बारहवीं शरीफ और जुलूस-ए-मोहम्मदी अकीदत और शानो-शौकत के साथ निकाला गया। जुलूस में सौरिख सहित आसपास के गांवों की विभिन्न मस्जिदों और मदरसों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
जुलूस सरदापुर, कबीरपुर, राजापुर, तालपार, नगरिया कायमपुर, नगरिया महादेव सहित आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों के साथ थाने के सामने स्थित मदरसे से एकत्र होकर नादेमऊ चौराहे पहुंचा। इसके बाद जुलूस अंबेडकर तिराहा, सदर बाजार, मोहल्ला ऊंचा, आजाद नगर, सरोजनी नगर और पुजारी वाली गली से होते हुए वापस सदर बाजार पहुंचा। यहां से गढ़ी वाली जामा मस्जिद के सामने सलाम पढ़ने के बाद जुलूस का समापन हुआ।
जुलूस के दौरान जगह-जगह मौलाना हजरात तकरीर करते हुए चल रहे थे और नात-ए-पाक पढ़ी जा रही थी। इस दौरान नारे तकबीर—अल्लाहु अकबर और नारे रिसालत—या रसूलल्लाह की सदाएं गूंजती रहीं। मौलाना हजरात ने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की जिंदगी और उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संदेश अमन, शांति और भाईचारे का संदेश है। उन्होंने लोगों से मोहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलने और सभी पड़ोसियों का ख्याल रखने की अपील की, चाहे उनका धर्म कोई भी हो।
जुलूस के स्वागत के लिए नगर में कई स्थानों पर पानी और शरबत की व्यवस्था की गई। नादेमऊ चौराहे पर तौसीफ यूसुफ और उनकी टीम ने गणमान्य लोगों का फूल मालाओं से स्वागत किया। वहीं सदर बाजार में इमरान खान, सोनू और उनकी टीम के नजरुल हसन, शाहरुख खान, ताहिर अली, उजैब काजी और अफजाल कुरैशी ने पानी, शरबत और पेठे की व्यवस्था की। हाफिज और मौलाना हजरात का भी फूल मालाओं से स्वागत किया गया। अनुराग पाल ने भी गणमान्य व्यक्तियों का फूल मालाओं से स्वागत किया।
जुलूस को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। सीओ और थाना प्रभारी नागेंद्र सिंह के नेतृत्व में जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा। थाना प्रभारी नागेंद्र सिंह, कस्बा इंचार्ज सुबोध सहाय और पुलिसकर्मी जुलूस के आगे-पीछे सुरक्षा व्यवस्था संभालते हुए चलते रहे।
इस मौके पर हाफिज रेहान, मौलाना मिसवाउल हसन, हाफिज जैनुल आबेदीन, हाफिज अय्यूब रजा, हाफिज अरशद अली, अली अब्बास नकवी, गुड्डू नंबरदार, फिरोज अख्तर गांधी, वारिद अली, अनिल कुमार पाल, अंसुल पाल, इमरान खान, शमसुल कमर, नवाजिश अली, फरहान मुशर्रफ सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। पुलिस प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।







