भारतीय स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में एक बार फिर अपना दबदबा साबित करते हुए महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। इस जीत के साथ उन्होंने लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ग्लास्गो में भारत के लिए यह प्रतियोगिता का पहला स्वर्ण और कुल तीसरा पदक रहा।
मीराबाई ने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 190 किलोग्राम का भार सफलतापूर्वक उठाया। उनका यह प्रदर्शन न सिर्फ स्वर्ण पदक दिलाने वाला रहा, बल्कि कई नए रिकॉर्ड भी उनके नाम कर गया।
नाइजीरिया की रुथ असुक्यो नियोंग ने कुल 168 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता, जबकि मलेशिया की इरेने जाने हेनरी 167 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहीं।
स्नैच में बनाया नया इतिहास
मुकाबले की शुरुआत मीराबाई के लिए आसान नहीं रही। स्नैच के पहले प्रयास में वह 82 किलोग्राम वजन उठाने में असफल रहीं। हालांकि दूसरे प्रयास में उन्होंने इसी वजन को सफलतापूर्वक उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद तीसरे प्रयास में उन्होंने 85 किलोग्राम वजन उठाकर अपना ही रिकॉर्ड बेहतर कर दिया। यह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में महिलाओं के स्नैच वर्ग का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बन गया। इससे पहले कोई भी महिला भारोत्तोलक स्नैच में 85 किलोग्राम वजन नहीं उठा सकी थी।
क्लीन एंड जर्क में भी दिखाया दम
स्नैच के बाद क्लीन एंड जर्क में भी मीराबाई ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 105 किलोग्राम वजन का प्रयास चुना। पहले प्रयास में वह सफल नहीं हो सकीं, लेकिन दूसरे प्रयास में आसानी से वजन उठाकर नाइजीरियाई प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ दिया। यह प्रदर्शन भी राष्ट्रमंडल खेलों का नया रिकॉर्ड साबित हुआ।
एक मुकाबले में चार रिकॉर्ड
मीराबाई का यह स्वर्ण पदक केवल जीत तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने प्रतियोगिता के दौरान कुल चार रिकॉर्ड अपने नाम किए। पहले 82 किलोग्राम के साथ नया स्नैच गेम्स रिकॉर्ड बनाया, फिर 85 किलोग्राम उठाकर उसे और बेहतर किया। इसके बाद 105 किलोग्राम के साथ क्लीन एंड जर्क का नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया और अंत में कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर नया कुल रिकॉर्ड भी स्थापित कर दिया।
स्वर्णिम हैट्रिक से रचा इतिहास
मीराबाई चानू ने इससे पहले 2018 और 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था। अब लगातार तीसरी बार शीर्ष स्थान हासिल कर उन्होंने भारतीय भारोत्तोलन के इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया। जीत के बाद उनकी आंखों में खुशी के आंसू साफ दिखाई दिए। यह केवल एक स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रतीक था।
मीराबाई का यह ऐतिहासिक प्रदर्शन भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का क्षण है और आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा भी।









