कन्नौज के कस्वा सौरिख में मोहर्रम की सात तारीख को अलम का जूलूस ग्राम कबीरपुर से राजापुर पहुंचा वहां मजलिस हुई उसके बाद इमामबाड़ा से जुलूस में कबीरपुर,राजापुर, सौरिख की अंजुमने नौहा ख्वानी और मातम करते हुए सी एस बी रोड से सदर बाज़ार होता हुआ मोहल्ला ऊंचा सौरिख दोनों इमामबाड़ों पर पहुंचकर नौहा मातम हुआ।
उसके बाद दोनों इमामबाड़ों से अलम का जूलूस मोहल्ला अधैती, शिखाना, पुजारीवाली गली से थाने के सामने से पाल तिराहा पर नौहा मातम करते हुए राजापुर व सौरिख का जूलूस अपने अपने इमामबाड़ों पर पहुंचकर समाप्त हुआ।
अली अब्बास नकवी मेम्बर आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने बताया कि क्या आप जानते है कि मोहर्रम क्या है यूं तो मोहर्रम इस्लामी साल का पहला महीना है जो चंद्र दर्शन के हिसाब से चलता है इसे हिजरी साल भी कहते है।
लेकिन मोहर्रम एक महीने का नाम नहीं रह गया है बल्कि आज मोहर्रम नाम है एक आंदोलन का भ्रष्टाचार के खिलाफ ना इंसाफी के खिलाफ सारी बुराइयों के खिलाफ आंदोलन है दुनिया के सारे केलेंडर नए साल के साथ खुशियों का पैग़ाम लेकर आते हैं लेकिन सिर्फ इस्लामी कलेंडर ऐसा होता है जो नए साल के साथ ग़म का पैग़ाम लेकर आता है ।
यह ग़म वह ग़म है जो सोते हुए इंसान को झिंझोड़ता है दिल के ज़ख्मो पर मरहम रखता है मजलूमों के अंदर उम्मीदों की किरण पैदा करता है और ज़ालिम के खिलाफ आवाज़ उठाने का हौंसला देता है आज से तकरीबन चौदह सौ साल पहले की बात है सन इकसठ हिजरी में मोहर्रम का महीना था।
मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और उनके इकहत्तर साथियों के साथ बहुत बे दर्दी से कर्बला (इराक)के बियाबान में ज़ालिम यज़ीदी फौजों ने शहीद कर दिया था यज़ीद वह ज़ालिम बादशाह था जिसकी हुकूमत अरब देशों पर ही नहीं बल्कि इराक,ईरान सीरिया तक ही नहीं कुछ यूरोपीय देशों के हिस्सों पर थी।
यदि यह कहा जाए कि उस ज़माने का सुपर पावर समझा जाता था तो यह कहना गलत नहीं होगा सीरिया जिसे शाम भी कहते हैं ,शाम उसकी राजधानी थी यज़ीद को मालूम था कि जब तक इमाम हुसैन उसका समर्थन नहीं करेंगे तब तक वह कामयाब नहीं होगा यह सोचकर उसने आदेश दिया कि इमाम हुसैन से समर्थन लिया जाए ऐसे में इमाम हुसैन अपने इकहत्तर साथियों के साथ उठ खड़े हुए और यज़ीद को उसके नाजायज़ मकसद में कामयाब नहीं होने दिया।
उन्होंने अपनी जान दे दी मगर यज़ीद को समर्थन नहीं दिया आज यज़ीद का कोई भी नाम लेने वाला नहीं है और इमाम हुसैन का नाम आज सारी दुनिया में लिया जा रहा है उन्हीं की याद में अलम का जूलूस निकाला जाता है इस मौके पर मोहर्रम कमेटी अध्यक्ष अली अब्बास नकवी , नाज़िम हुसैन,हुसैन हैदर, रईसुल हसन, दिलदार हुसैन,शब्बर अली,निशात हुसैन ,हैदर अब्बास,अनवार हैदर आदि गणमान्य लोग मौजूद रहे।
नगर पंचायत की तरफ से साफ सफाई की व्यवस्था और जुलूस के रास्तों पर चूना डलवाया गया तथा पुलिस प्रशासन की व्यवस्था चाक चौबंद रही।







