लखनऊ: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित सहारा शहर में अचानक छापेमारी कर सहारा समूह की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। करीब दो घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने समूह की संपत्तियों और जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। इस छापेमारी के बाद सहारा प्रबंधन और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
दो घंटे तक चली कार्रवाई, दस्तावेजों की गहन जांच
ईडी की टीम जैसे ही गोमतीनगर स्थित सहारा शहर पहुंची, वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी हैरान रह गए। लगभग दो घंटे तक चली इस कार्रवाई में जांच अधिकारियों ने कार्यालय में मौजूद फाइलों और रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। बताया जा रहा है कि टीम ने विशेष रूप से उन दस्तावेजों को जब्त किया है, जो समूह की जमीन और अन्य संपत्तियों की खरीद-फरोख्त से जुड़े हैं।
इस दौरान परिसर में मौजूद कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हाल के दिनों में किन-किन संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की गई या प्रयास किए गए।
तीन राज्यों में पहले भी हो चुकी है छापेमारी
लखनऊ में की गई यह कार्रवाई एक बड़े जांच अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। इससे पहले 26 फरवरी को ईडी के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने ओडिशा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भी तलाशी अभियान चलाया था।
जांच में सामने आया था कि बहरामपुर स्थित ‘सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड’ की 43 एकड़ जमीन में से 32 एकड़ जमीन दिसंबर 2025 में गुपचुप तरीके से बेच दी गई। आरोप है कि यह सौदा एक निरस्त बोर्ड प्रस्ताव के आधार पर एक कर्मचारी के नाम पर किया गया, जो अदालत के आदेशों का उल्लंघन माना जा रहा है। ईडी को शक है कि इस पूरे मामले में समूह के वरिष्ठ प्रबंधन की भूमिका हो सकती है।
अन्य राज्यों में भी जांच की संभावना
ईडी अब यह जांच कर रही है कि क्या इसी तरह की संपत्ति बिक्री उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी की गई है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि अदालत के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए समूह की कई संपत्तियों को चुपचाप बेचने की कोशिश की गई।
फिलहाल लखनऊ का सहारा शहर इस जांच का प्रमुख केंद्र बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि जहां-जहां भी सहारा समूह की संपत्तियों को अवैध तरीके से बेचने के प्रयास सामने आएंगे, वहां कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शुक्रवार की इस छापेमारी के बाद सहारा समूह के शीर्ष अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।







