कन्नौज। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित करीब 100 वर्ष पुरानी वक्फ मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की कन्नौज इकाई ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने और मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग की है।
AIMIM कन्नौज के जिलाध्यक्ष इशरत खान ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जोड़कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
सरकारी भूमि बताकर कार्रवाई का आरोप
ज्ञापन में दावा किया गया है कि संबंधित मस्जिद करीब 100 वर्ष पुरानी है और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है। AIMIM का आरोप है कि एक निजी व्यक्ति की शिकायत के आधार पर मस्जिद को सरकारी भूमि पर स्थित बताते हुए प्रशासन ने बुलडोजर की कार्रवाई की।
पार्टी ने इस कार्रवाई की परिस्थितियों और कानूनी प्रक्रिया की जांच की मांग की है। AIMIM जिलाध्यक्ष का कहना है कि किसी धार्मिक स्थल के संबंध में कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस, सुनवाई और उपलब्ध कानूनी उपचार का अवसर मिलना चाहिए।
मंदिर और मस्जिद दोनों होने का भी उठाया सवाल
ज्ञापन में यह सवाल भी उठाया गया है कि यदि एक ही परिसर में मंदिर और मस्जिद दोनों मौजूद हैं, तो केवल मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई। पार्टी ने कहा कि इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
इशरत खान ने संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 300A तथा वक्फ से संबंधित कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए मामले की जांच की मांग की।
AIMIM की प्रमुख मांगें
AIMIM ने ज्ञापन के माध्यम से कई मांगें रखी हैं—
- पूरे प्रकरण की हाईकोर्ट के सिटिंग जज से न्यायिक जांच कराई जाए।
- यदि जांच में अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- ध्वस्त मस्जिद का उसी स्थान पर वक्फ बोर्ड की निगरानी में पुनर्निर्माण कराया जाए।
- भविष्य में वक्फ संपत्तियों के संबंध में कार्रवाई से पहले संबंधित वक्फ बोर्ड को विधिवत पक्षकार बनाए जाने के लिए स्पष्ट शासनादेश जारी किया जाए।
इशरत खान ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रपति इस मामले का संज्ञान लेकर संविधान और कानून के शासन के अनुरूप उचित कदम उठाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करेंगी।
हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए आरोपों और मांगों पर प्रशासन अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है।






