भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने आम बजट को किसान, मजदूर और ग्रामीण भारत की मूल समस्याओं के समाधान में असफल बताया है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई, खेती की बढ़ती लागत, कर्ज का बोझ और किसानों की गिरती आय जैसे गंभीर मुद्दों पर बजट में कोई ठोस पहल नजर नहीं आती।
टिकैत ने कहा कि किसानों के लिए न तो कर्जमाफी का कोई स्पष्ट प्रावधान किया गया और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने की दिशा में कोई कदम उठाया गया। ग्रामीण रोजगार और बेरोजगारी के सवाल पर भी बजट निराशाजनक है।
रोजगार योजनाओं को मजबूत करने, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने और मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बजट में स्पष्ट रोडमैप नहीं दिखता।
उन्होंने आशंका जताई कि इससे ग्रामीण युवाओं में बेरोजगारी की समस्या और गहरी हो सकती है। साथ ही, आदिवासी समाज के जल-जंगल-ज़मीन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसे बुनियादी मुद्दों को भी बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली।
टिकैत के अनुसार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के बजाय बजट का झुकाव एक बार फिर शहरी और कॉरपोरेट हितों की ओर दिखाई देता है।
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