उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के श्रमिकों को बड़ी राहत देते हुए न्यूनतम मजदूरी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस फैसले से प्रदेशभर के लाखों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों जैसे नोएडा और गाजियाबाद में काम करने वाले श्रमिकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
यह निर्णय एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया, जिसकी अध्यक्षता औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने की। समिति ने श्रमिकों को तीन श्रेणियों—अकुशल, अर्धकुशल और कुशल—में विभाजित करते हुए नई मजदूरी दरें तय की हैं। इन दरों में मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता भी शामिल किया गया है।
नोएडा और गाजियाबाद में नई मजदूरी दरें
गौतमबुद्धनगर (नोएडा) और गाजियाबाद जिलों में श्रमिकों को सबसे अधिक वेतन मिलेगा:
- अकुशल श्रमिक: 13,690 रुपये प्रति माह
- अर्धकुशल श्रमिक: 15,059 रुपये प्रति माह
- कुशल श्रमिक: 16,868 रुपये प्रति माह
यह वृद्धि मार्च के मुकाबले लगभग 3,288 रुपये तक अधिक है, जो राज्य में सबसे ज्यादा है।
अन्य प्रमुख शहरों में मजदूरी
लखनऊ सहित 16 नगर निगम वाले जिलों में नई दरें इस प्रकार हैं:
- अकुशल: 13,006 रुपये
- अर्धकुशल: 14,306 रुपये
- कुशल: 16,025 रुपये
बाकी जिलों में नई मजदूरी
प्रदेश के अन्य 57 जिलों में श्रमिकों को भी बढ़ी हुई मजदूरी का लाभ मिलेगा:
- अकुशल: 12,356 रुपये
- अर्धकुशल: 13,591 रुपये
- कुशल: 15,224 रुपये
इन क्षेत्रों में मजदूरी में लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ईंट भट्टा श्रमिकों के लिए नई दरें
ईंट भट्टा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के लिए भी नई मजदूरी तय की गई है:
- प्रति 1000 ईंट बनाने पर: 719 रुपये
- भराई कार्य: 217 से 260 रुपये प्रति 1000 ईंट
- निकासी कार्य: 217 रुपये प्रति 1000 ईंट
क्या होगा असर?
इस फैसले से राज्य के श्रमिकों की आय में सुधार होगा और उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। बढ़ती महंगाई के बीच यह कदम श्रमिक वर्ग को आर्थिक स्थिरता देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सरकार का यह निर्णय न केवल श्रमिकों के हित में है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के मनोबल को भी बढ़ाएगा।









