मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने SIR के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) की लगातार हो रही मौतों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यों को आदेश दिया है कि वे पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त कर्मचारी उपलब्ध कराएँ, ताकि मौजूदा BLOs पर पड़ रहा अत्यधिक कार्यभार कम किया जा सके।
मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के स्थान पर अब सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि SIR एक वैधानिक प्रक्रिया है, इसलिए राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर BLOs के कार्य-घंटे और दबाव को संतुलित करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी को स्वास्थ्य या अन्य कारणों से ड्यूटी से छूट की जरूरत है, तो संबंधित अधिकारी को मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करनी चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि आवश्यकतानुसार कर्मचारियों की संख्या को दो गुना या तीन गुना तक बढ़ाया जा सकता है—जैसे 10,000 कर्मचारियों की जगह 20,000 या 30,000 तक तैनात किए जा सकते हैं। सीजेआई ने टिप्पणी की, “BLOs राज्य सरकारों के कर्मचारी हैं। यदि कोई व्यक्ति अस्वस्थ या असमर्थ है, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह वैकल्पिक कर्मचारी की नियुक्ति करे।”
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया गया था कि 9 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों से मिले आंकड़ों के मुताबिक अब तक 35–40 BLOs की मौत अत्यधिक काम के बोझ की वजह से हुई है। कई मामलों में परिवार इन अधिकारियों के निधन से पूरी तरह असहाय हो गए हैं। याचिका में मृत BLOs के परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग उठाई गई है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को “झूठा और बेबुनियाद” बताते हुए पूरी तरह खारिज करने की माँग की है।
यह मामला तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टी टीवीके द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें SIR प्रक्रिया के दौरान BLOs पर बढ़ते दबाव और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।













