Ayodhya Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच दल (SIT) को अब तक की जांच की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जारी किया नोटिस?
सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर ट्रस्ट को मिलने वाले करोड़ों रुपये के दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच अदालत की निगरानी में कराई जाए, ताकि तथ्यों की पारदर्शी तरीके से जांच हो सके।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जवाब मांगा। साथ ही SIT को जांच की वर्तमान स्थिति बताने वाली विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
इन तीन याचिकाओं पर हुई सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले से जुड़ी तीन अलग-अलग याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई की।
इनमें शामिल हैं:
- वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की रिट याचिका।
- अजय कुमार राय और अन्य की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका।
- राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह की याचिका।
अदालत की निगरानी में जांच की मांग
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राम मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की राशि का प्रबंधन पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि मामले की जांच न्यायिक निगरानी में कराई जाए ताकि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 20 जुलाई तय की है। इस दौरान उत्तर प्रदेश SIT की स्टेटस रिपोर्ट और केंद्र सरकार व ट्रस्ट की ओर से दाखिल जवाब पर आगे की सुनवाई होगी।
अभी जांच जारी, आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं
फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोप न्यायिक परीक्षण और जांच के अधीन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अभी किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं की है। मामले की सच्चाई का निर्धारण जांच रिपोर्ट और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।





