LUCKNOW: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नाबालिग और बालिग लड़कियों के लापता होने के मामलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गंभीर चिंता जताई है। एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को लंबित मामलों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट और शपथ पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों ने अदालत को बताया कि पिछले छह महीनों में अपहरण, बहला-फुसलाकर ले जाने और लापता होने की कुल 261 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 227 बच्चियों और युवतियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है, जबकि 34 मामलों में अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है।
डीसीपी सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अदालत में उपस्थित होकर जांच की प्रगति की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि लंबित मामलों की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था लागू की गई है तथा जोन स्तर पर नियमित समीक्षा की जा रही है। साथ ही, किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
अदालत ने कहा कि 34 बच्चियों का अब तक पता न चल पाना चिंता का विषय है, हालांकि बड़ी संख्या में बच्चियों की बरामदगी के लिए पुलिस द्वारा किए गए प्रयासों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। न्यायालय ने बच्चियों की सुरक्षा और उनके परिवारों की चिंता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मामले की लगातार निगरानी जारी रखने की बात कही।
हाईकोर्ट ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे 3 जुलाई तक सभी लंबित मामलों की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट और शपथ पत्र दाखिल करें।










