हर महिला और किशोरी के लिए उसकी सेहत सबसे कीमती पूंजी होती है। लेकिन प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) जैसे विषयों पर खुलकर बात न होने की वजह से कई बार गंभीर बीमारियाँ समय पर पकड़ी नहीं जा पातीं। ऐसी ही एक बीमारी है सर्वाइकल कैंसर, जिसे सही जानकारी और समय पर टीकाकरण से काफी हद तक रोका जा सकता है।
आज चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के कारण इससे बचाव का एक प्रभावी तरीका उपलब्ध है — एचपीवी वैक्सीन (HPV Vaccine)। यह टीका महिलाओं और पुरुषों दोनों को एक खतरनाक वायरस से सुरक्षा देता है, जो कई प्रकार के कैंसर का कारण बन सकता है।
नीचे जानते हैं इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।
एचपीवी क्या है?
एचपीवी का पूरा नाम Human papillomavirus है। यह एक सामान्य लेकिन व्यापक रूप से फैलने वाला वायरस है, जो त्वचा और जननांग क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। इसके 100 से अधिक प्रकार पाए जाते हैं, जिनमें कुछ उच्च जोखिम वाले (High-risk types) होते हैं।
इनमें से कुछ प्रकार महिलाओं में Cervical cancer, योनि कैंसर, गुदा कैंसर और गले के कैंसर का कारण बन सकते हैं। अक्सर एचपीवी संक्रमण बिना लक्षण के रहता है और कई मामलों में अपने आप ठीक भी हो जाता है। लेकिन यदि संक्रमण लंबे समय तक बना रहे, तो यह गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव पैदा कर सकता है।
एचपीवी वैक्सीन क्या है?
एचपीवी वैक्सीन (HPV Vaccine) एक सुरक्षात्मक टीका है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को एचपीवी के खतरनाक प्रकारों से लड़ने के लिए तैयार करता है। यह वैक्सीन शरीर में वायरस का एक निष्क्रिय या कृत्रिम हिस्सा प्रवेश कराती है, जिससे शरीर एंटीबॉडी बनाना सीखता है।
भविष्य में यदि असली वायरस शरीर में प्रवेश करे, तो ये एंटीबॉडी तुरंत उसे निष्क्रिय कर देती हैं और संक्रमण को फैलने से रोकती हैं।
भारत में उपलब्ध प्रमुख एचपीवी वैक्सीन
भारत में वर्तमान में दो प्रमुख वैक्सीन प्रचलित हैं:
- Gardasil – यह एचपीवी के प्रकार 6, 11, 16 और 18 से सुरक्षा देती है।
- Cervarix – यह मुख्य रूप से प्रकार 16 और 18 से बचाव करती है।
एचपीवी के प्रकार 16 और 18 को सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
एचपीवी वैक्सीन कब लगवानी चाहिए?
- विशेषज्ञों के अनुसार, 9 से 14 वर्ष की आयु में यह वैक्सीन लगवाना सबसे प्रभावी रहता है। इस उम्र में प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत प्रतिक्रिया देती है और दीर्घकालिक सुरक्षा मिलती है।
- यदि इस उम्र में टीका नहीं लगा हो, तो 26 वर्ष तक इसे लगवाया जा सकता है। कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर 45 वर्ष तक भी इसकी सलाह दे सकते हैं।
कितनी डोज़ जरूरी हैं?
- 9–14 वर्ष: दो डोज़ (दूसरी डोज़ पहली के 6 महीने बाद)
- 15 वर्ष या उससे अधिक: तीन डोज़ (0, 1–2 और 6 महीने के अंतराल पर)
एचपीवी वैक्सीन के लाभ
- सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के जोखिम को काफी कम करती है
- योनि, गुदा और गले के कैंसर से भी बचाव
- जननांग मस्सों (Genital Warts) की रोकथाम
- भविष्य के कैंसर जोखिम को लेकर मानसिक तनाव में कमी
क्या पुरुषों को भी यह वैक्सीन लगवानी चाहिए?
हाँ। एचपीवी संक्रमण पुरुषों में भी गले, गुदा और जननांग कैंसर का कारण बन सकता है। इसलिए 9 से 26 वर्ष के लड़कों को भी यह टीका लगवाने की सलाह दी जाती है। इससे संक्रमण के प्रसार को भी रोका जा सकता है।
क्या यह वैक्सीन सुरक्षित है?
एचपीवी वैक्सीन को सुरक्षित और प्रभावी माना गया है। दुनिया भर में करोड़ों लोगों को यह टीका लगाया जा चुका है। सामान्य दुष्प्रभावों में इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, सूजन या हल्का बुखार शामिल हो सकता है, जो जल्दी ठीक हो जाता है।
गर्भवती महिलाओं को यह टीका नहीं दिया जाता, लेकिन स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए इसे सुरक्षित माना जाता है।
नियमित जांच भी है जरूरी
टीकाकरण के साथ-साथ नियमित जांच भी आवश्यक है। 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को समय-समय पर Pap smear करवाना चाहिए। इससे गर्भाशय ग्रीवा में होने वाले शुरुआती बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
“ध्यान रहे, वैक्सीन 100% सुरक्षा नहीं देती, इसलिए जांच करवाना महत्वपूर्ण है।”
भारत में उपलब्धता और लागत
भारत में एचपीवी वैक्सीन निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में उपलब्ध है। इसकी कीमत ब्रांड और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सरकार भी इसे व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास कर रही है।
सर्वाइकल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसे जागरूकता, समय पर टीकाकरण और नियमित जांच के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है। एचपीवी वैक्सीन महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कदम है।
स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। सही जानकारी और समय पर कदम ही बेहतर भविष्य की कुंजी है।







