दक्षिण दिल्ली के कालकाजी स्थित देशबंधु कॉलेज में शनिवार को “वार्ता 3.0” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं की नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करना और “विकसित भारत 2047” के विज़न को साकार करने में उनकी भूमिका पर गंभीर विमर्श करना था। पूरे दिन चले इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे पंजीकरण के साथ हुई। इसके बाद उद्घाटन सत्र में दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से युवाओं के नेतृत्व, शांति और राष्ट्र निर्माण के संदेश को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की थीम “Celebrating Youth Leadership for Peace & Vision 2047: Viksit Bharat” रही, जिसने पूरे आयोजन को एक स्पष्ट दिशा दी।
युवाओं को बताया विकसित भारत का “आर्किटेक्ट”
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में Prof. Sanjoy Roy ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को सही शिक्षा, कौशल और अवसर मिलें तो वे न केवल देश की दिशा बदल सकते हैं बल्कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेज केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं होने चाहिए, बल्कि ऐसे मंच बनने चाहिए जहाँ से सामाजिक नेतृत्व, नवाचार और सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत हो।
उद्घाटन सत्र में कई प्रमुख वक्ताओं की भागीदारी
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कई विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया और युवाओं के सामने अपने विचार रखे। इस अवसर पर Sanjay Rai, Krishna Kumar Gupta, Shubhro Roy और मेजर जनरल Dilawar Singh ने युवाओं को देश निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के विचार, ऊर्जा और नेतृत्व पर निर्भर करता है। यदि युवाओं को सही दिशा और मंच मिले तो वे समाज और राष्ट्र दोनों को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर पैनल चर्चा
कार्यक्रम के दौरान “Empowering Education & Skill Development Vision 2047” विषय पर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इस सत्र में Shiv Kumar Nigam (Ministry of Electronics and Information Technology), Dr Ruhi Banerjee, Garvit Grover और Uday Shankar Singh ने भाग लिया।
इस चर्चा में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में नवाचार और कौशल विकास को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि डिजिटल स्किल, उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व भी युवाओं को सशक्त बनाने के लिए जरूरी हैं।
युवाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति और कार्यशाला
दोपहर के सत्र में “युवा एक सोच” शीर्षक से एक नाट्य प्रस्तुति भी आयोजित की गई, जिसने समाज और राष्ट्र के प्रति युवाओं की जिम्मेदारी को प्रभावी तरीके से दर्शाया। इसके बाद “Varta 3.0” कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं ने अपने विचार साझा किए और बताया कि किस प्रकार युवा नेतृत्व वाली पहलें देश के विकास में योगदान दे सकती हैं।
कार्यशाला में कई छात्रों और प्रतिभागियों ने सामाजिक नवाचार, शिक्षा, तकनीक और सामुदायिक विकास से जुड़े विचार प्रस्तुत किए।
उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिला सम्मान
कार्यक्रम के अंत में “GYPC Awards” के तहत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। इस दौरान कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवा नेताओं और पेशेवरों को उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
इसके बाद “Music for the Mind: The Birth of Rhythmshala” सत्र आयोजित किया गया, जिसमें संगीत और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध पर चर्चा की गई। इस सत्र में बताया गया कि कला और संगीत युवाओं के मानसिक संतुलन और रचनात्मकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणादायक मंच
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने स्वयंसेवकों और सहयोगियों को सम्मानित किया तथा सभी प्रतिभागियों के साथ समूह फोटो लिया गया।
कुल मिलाकर “वार्ता 3.0” केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक ऐसा मंच साबित हुआ, जहाँ युवाओं, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने मिलकर विकसित भारत 2047 के विज़न को लेकर विचार साझा किए। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि युवा अपनी ऊर्जा, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता को सही दिशा में लगाएं तो भारत के उज्ज्वल भविष्य का सपना अवश्य साकार हो सकता है।









