Uttar Pradesh की राजधानी लखनऊ में बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही मानवेंद्र सिंह का शव उनके घर पहुंचा, परिजनों में कोहराम मच गया। शोकाकुल परिवार ने किसी तरह खुद को संभाला और वीआईपी रोड स्थित बैकुंठ धाम में उनका अंतिम संस्कार किया। मानवेंद्र के भतीजे कृत सिंह ने मुखाग्नि दी।
आशियाना के सेक्टर-एल निवासी 49 वर्षीय मानवेंद्र सिंह, जो शराब कारोबारी और पैथोलॉजी संचालक थे, की हत्या उनके ही 21 वर्षीय बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने कर दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने लाइसेंसी राइफल से गोली मारकर पिता की हत्या की और बाद में शव के टुकड़े कर दिए। दोनों हाथ और पैर पारा के सदरौना क्षेत्र में फेंक दिए गए, जबकि सिर सहित धड़ घर में एक नीले ड्रम से बरामद हुआ।
डीसीपी मध्य विक्रांत वीर ने बताया कि 21 फरवरी को मानवेंद्र की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान बेटे अक्षत से पूछताछ की गई, जिसमें उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली। पूछताछ में सामने आया कि पिता बेटे पर नीट परीक्षा की तैयारी को लेकर दबाव बना रहे थे। 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे इसी मुद्दे पर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद गुस्से में अक्षत ने गोली चला दी, जिससे मौके पर ही मानवेंद्र की मौत हो गई।
घटना के समय उसकी छोटी बहन कृति अपने कमरे में थी। गोली की आवाज सुनकर बाहर आने पर उसने पिता को मृत पाया। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद अक्षत ने शव को तीसरी मंजिल से घसीटकर नीचे लाया और उसे ठिकाने लगाने की योजना बनाई। पहले कार से शव को गोमती नदी में फेंकने का प्रयास किया, लेकिन वजन अधिक होने के कारण सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसने आरी खरीदकर शव के टुकड़े किए। धड़ को छिपाने के लिए नीला ड्रम लाकर उसमें रख दिया, जबकि हाथ-पैर अलग स्थान पर फेंक दिए।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मानवेंद्र के पिता सुरेंद्र पाल सिंह, जो सेवानिवृत्त दरोगा हैं और जालौन में रहते हैं, सूचना मिलते ही लखनऊ पहुंच गए।
पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद अक्षत ने अपनी बहन को जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया और उसे चार दिन तक घर में ही बंद रखा। कृति गहरे सदमे में है और सामान्य रूप से बात नहीं कर पा रही है। मामले की जांच जारी है।









