नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अपने कर्मचारियों के लिए नई बेंच नीति लागू कर दी है, जिसके चलते करीब 12,000 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। यह संख्या कंपनी के कुल कार्यबल का लगभग 2% है।
टीसीएस ने नई नीति के तहत यह शर्त रखी है कि कर्मचारियों को साल में कम-से-कम 225 दिन बिलेबल प्रोजेक्ट्स पर कार्य करना होगा। यदि कोई कर्मचारी लंबे समय तक प्रोजेक्ट से बाहर यानी ‘बेंच’ पर रहता है, तो उसे कंपनी से बाहर का निकाला जा सकता है। अब कर्मचारी सिर्फ 35 दिनों तक ही बेंच पर रह सकेंगे।

कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह कदम संगठन की कार्यक्षमता और उत्पादकता बढ़ाने के मकसद से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि बदलते बाजार की मांग और क्लाइंट की प्राथमिकताओं के अनुसार टीसीएस को अपने संसाधनों का कुशल प्रबंधन करना जरूरी हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह छंटनी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी और जिन कर्मचारियों के पास लंबे समय से कोई सक्रिय प्रोजेक्ट नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बाहर किया जाएगा।
आईटी सेक्टर में यह फैसला एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी अपनी आंतरिक नीतियों में बदलाव कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई और ऑटोमेशन के बढ़ते प्रयोग के कारण कंपनियां अब दक्ष और परियोजना-उन्मुख कर्मचारियों को ही प्राथमिकता दे रही हैं।
टीसीएस की इस नीति पर कर्मचारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आंतरिक रूप से इस फैसले को लेकर असंतोष की खबरें जरूर सामने आ रही हैं।









