कन्नौज से आज एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने सोशल मीडिया को दो हिस्सों में बांट दिया है। सौरिख में बीच सड़क पर ‘गुंडागर्दी’ का नंगा नाच चल रहा था। एक डीसीएम चालक भीड़ और दबंगों के बीच फंसा था, उसकी जान पर बन आई थी। तभी वहां से गुजर रहे थानेदार ने न आव देखा न ताव—कानून की किताब बाद में खोली, पहले उस बेबस ड्राइवर की जान बचाने के लिए ‘फैसला ऑन द स्पॉट’ कर दिया।
तस्वीरें कन्नौज के सौरिख थाना क्षेत्र की हैं। यहां नादेमऊ चौराहे पर शाम के वक्त कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। इटावा के रहने वाले डीसीएम चालक मित्र प्रकाश को कुछ बाइक सवार युवकों ने घेर लिया था।विवाद सिर्फ कहासुनी का नहीं था, बल्कि जानलेवा होता जा रहा था।
चश्मदीदों के मुताबिक, बाइक सवार युवकों ने डीसीएम को जबरन रोका और चालक को नीचे खींचकर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। ड्राइवर अकेला था और सामने हमलावर हावी थे। हालात ऐसे थे कि अगर कुछ देर और कोई मदद न मिलती, तो सड़क पर ही चालक के साथ कोई अनहोनी घटना भी हो सकती थी।
सड़क पर चल रहे इस तांडव के बीच, वहां से गुजर रहे सौरिख थाना प्रभारी जयंती प्रसाद गंगवार की नजर भीड़ पर पड़ी। उन्होंने एक पल की भी देरी नहीं की। वायरल वीडियो गवाह है कि कैसे थाना प्रभारी ने भीड़ के बीच घुसकर, डीसीएम चालक को पीट रहे युवक को कॉलर से पकड़कर खींचा।
जी हां, वीडियो में पुलिस की लात और थप्पड़ जरूर दिख रहे हैं, लेकिन इसके पीछे की वजह को समझना ज्यादा जरूरी है। एसएचओ का यह गुस्सा उस वक्त एक ढाल बन गया। उन्होंने आरोपी को न सिर्फ ड्राइवर से दूर किया, बल्कि जिस तरह से उस पर टूट पड़े, उससे यह साफ संदेश गया कि खाकी की मौजूदगी में गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस के इस एक्शन के बाद अब शहर में बहस छिड़ गई है।एक धड़ा जो नियमों की दुहाई दे रहा है, उनका कहना है कि पुलिस को संयम रखना चाहिए था, वर्दी पहनकर सरेराह हाथ-पैर चलाना कानूनन गलत है।लेकिन, एक बहुत बड़ा वर्ग पुलिस की इस कार्रवाई को सही ठहरा रहा है। लोगों का कहना है कि—’उस वक्त मौके की नजाकत को देखिए।’
अगर एसएचओ साहब कागजी कार्रवाई या बातचीत में उलझते, तो शायद वो बाइक सवार उस ड्राइवर के साथ कोई बड़ी घटना कर सकते थे।समर्थकों का कहना है कि जो अपराधी कानून हाथ में लेकर किसी गरीब को पीट रहा हो, उसके साथ पुलिस को ‘गांधीगिरी’ नहीं, बल्कि ‘सिंघम’ बनकर ही पेश आना चाहिए। पुलिस की इसी दहशत ने शायद एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।
फिलहाल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है और पीड़ित चालक की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।लेकिन यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ गई है—जब किसी निर्दोष की जान खतरे में हो, तो पुलिस को क्या करना चाहिए? प्रक्रिया का पालन या ‘फैसला ऑन द स्पॉट’? सौरिख थाना प्रभारी ने दूसरा रास्ता चुना और एक ड्राइवर की जान बचा ली।
कन्नौज से आज एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने सोशल मीडिया को दो हिस्सों में बांट दिया है। सौरिख में बीच सड़क पर ‘गुंडागर्दी’ का नंगा नाच चल रहा था। एक डीसीएम चालक भीड़ और दबंगों के बीच फंसा था, उसकी जान पर बन आई थी। तभी वहां से गुजर रहे थानेदार ने न आव देखा न ताव—कानून की किताब बाद में खोली, पहले उस बेबस ड्राइवर की जान बचाने के लिए ‘फैसला ऑन द स्पॉट’ कर दिया।










