पाकिस्तान अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति से उबरने के लिए अब रक्षा सौदों का सहारा ले रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान चीन के JF-17 लड़ाकू विमानों को 9 देशों को बेचने की प्रक्रिया में जुटा है। इन देशों में सऊदी अरब सहित 8 मुस्लिम राष्ट्र शामिल हैं।
पाकिस्तान और चीन के बीच इस डील को एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) के तहत अंजाम दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत इस्लामाबाद में जे-सीरीज फाइटर जेट्स का निर्माण किया जा रहा है।
‘ऑलवेज ब्रदर डील’ के तहत हो रही बिक्री
चीन और पाकिस्तान के बीच इस रक्षा समझौते को ‘ऑलवेज ब्रदर डील’ नाम दिया गया है। इसके तहत दोनों देश मिलकर करीब 200 लड़ाकू विमानों की बिक्री का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। समझौते के अनुसार, इनमें से 80 प्रतिशत हिस्सेदारी चीन की होगी, जबकि 20 प्रतिशत विमान पाकिस्तान के खाते में आएंगे।
किन देशों को बेचे जा रहे JF-17 फाइटर जेट
पाकिस्तान ने जिन 9 देशों को JF-17 फाइटर जेट बेचने की प्रक्रिया शुरू की है, उनमें शामिल हैं:
- सऊदी अरब
- नाइजीरिया
- अजरबैजान
- लीबिया
- मोरक्को
- इंडोनेशिया
- इथियोपिया
- सूडान
इन देशों के साथ बातचीत और सौदे की प्रक्रिया अलग-अलग स्तरों पर चल रही है।
सऊदी कर्ज चुकाने की कोशिश
इस डील के पीछे पाकिस्तान की सबसे बड़ी मजबूरी उसकी आर्थिक तंगी मानी जा रही है। पाकिस्तान पर सऊदी अरब का करीब 70 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। फाइटर जेट सौदों के जरिए पाकिस्तान अब तक लगभग 18 हजार करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है।
आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए हर संभव रास्ता अपना रहा है। रक्षा उपकरणों की बिक्री के जरिए वह न केवल विदेशी मुद्रा जुटाना चाहता है, बल्कि अपने कर्ज का बोझ भी कम करने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, यह रणनीति पाकिस्तान को कितनी राहत दिला पाएगी, यह आने वाले समय में ही साफ हो सकेगा।











