IAS Rinku Singh Resigned : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से आई एक खबर ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। 2023 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपने पद से इस्तीफा देकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या एक ईमानदार अधिकारी के लिए सिस्टम में जगह बची है?
करीब आठ महीने पहले उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध किया गया था, लेकिन उनका दावा है कि इस दौरान उन्हें कोई ठोस जिम्मेदारी नहीं दी गई। निराश होकर उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति, डीओपीटी और उत्तर प्रदेश के नियुक्ति विभाग को भेज दिया है। साथ ही उन्होंने समाज कल्याण विभाग में वापसी की भी मांग की है।
यह खबर जैसे ही उनके अलीगढ़ स्थित घर पहुंची, परिवार में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। उनके पिता सौदान सिंह राही ने कहा कि उनके बेटे ने हमेशा ईमानदारी का रास्ता चुना, लेकिन उसे वह सम्मान नहीं मिला जिसके वह हकदार थे।
रिंकू सिंह राही की छवि एक सख्त और ईमानदार अधिकारी की रही है। उनके पिता के अनुसार, उन्हें कई बार करोड़ों रुपये के प्रलोभन दिए गए, लेकिन उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। यही नहीं, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर उन पर जानलेवा हमला भी हुआ, जिसमें उनकी एक आंख की रोशनी प्रभावित हो गई। इसके बावजूद उन्होंने अपने कर्तव्य से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।
परिजनों का आरोप है कि सरकार ने उनकी योग्यता को नजरअंदाज किया। उनका मानना है कि यदि उन्हें उचित जिम्मेदारी दी जाती, तो शायद वे इस्तीफा देने जैसा कदम नहीं उठाते।
अपने 7 पेज के त्यागपत्र में राही ने विस्तार से अपनी पीड़ा व्यक्त की है। शाहजहांपुर में एसडीएम रहते हुए उन्होंने पारदर्शिता लाने की कोशिश की और तालाबों की नीलामी पर रोक लगाई। लेकिन बाद में उन्हें प्रभावी जिम्मेदारियों से दूर रखा गया, जिससे वे खुद को असहाय महसूस करने लगे।
उन्होंने लिखा कि बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्हें कोई ठोस कार्य नहीं सौंपा गया, जिससे उनका करियर प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में ईमानदारी से काम करना कठिन होता जा रहा है, क्योंकि भ्रष्टाचार गहराई तक जड़ें जमा चुका है।
राही ने अपने इस्तीफे को “तकनीकी त्यागपत्र” बताया है—एक ऐसा निर्णय जो मजबूरी में लिया गया। उन्होंने सरकार से साफ कहा है कि या तो उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए या उन्हें उनकी क्षमता के अनुरूप जिम्मेदारी दी जाए।
उनकी कहानी संघर्ष से भरी रही है। उनके पिता ने आटा चक्की चलाकर बच्चों को पढ़ाया और आज सभी बच्चे उच्च पदों पर हैं। ऐसे परिवार से आने वाले रिंकू सिंह राही का यह कदम अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है—क्या एक ईमानदार अधिकारी को न्याय मिलेगा, या यह मामला भी सिस्टम की फाइलों में दबकर रह जाएगा?










