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बिजली कर्मचारियों का निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन: क्या पड़ेगा बिजली सेवाओं पर असर?

On: November 27, 2025 11:31 AM
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electricity employee strike

उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी निजीकरण के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। बुधवार को जिले–जिले में रैलियां निकालकर निजीकरण के खिलाफ मोर्चा खोला गया। आज यानी बृहस्पतिवार को यूपी ही नहीं बल्कि पूरे देश में बिजली कर्मचारी और इंजीनियर सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

बिजली कर्मियों ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025, निजीकरण और नए श्रम कानूनों को मजदूर विरोधी बताते हुए जमकर विरोध जताया। संयुक्त किसान मोर्चा और ऑल इंडिया ट्रेड यूनियनों ने भी इसमें साथ दिया। लखनऊ के परिवर्तन चौक पर निकली रैली में बिजली कर्मचारी, किसान और मजदूर शामिल रहे।

रैली में उठीं प्रमुख मांगे

प्रदर्शन के दौरान कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई गईं—

  • निजीकरण प्रस्ताव को तुरंत रद्द किया जाए
  • इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 वापस लिया जाए
  • स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का काम रोका जाए
  • किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए

संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि 27 नवंबर को नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर देशभर में कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं।

विद्युत नियामक आयोग ने अपने टैरिफ आदेश में स्पष्ट कहा है कि निगमों के पास उपभोक्ताओं का कुल 18,592 करोड़ रुपये का सरप्लस इस वर्ष भी मौजूद है। इसके बावजूद बिजली कंपनियों की खराब वित्तीय स्थिति के कारण बिजली दरों में कमी संभव नहीं हो सकी।

51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस के बावजूद दरें कम न होने पर सवाल

प्रदेश के विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बताया कि निगमों के पास कुल 51,000 करोड़ रुपये का सरप्लस है, इसलिए बिजली दरों में लगभग 13% की कमी की जानी चाहिए।
इसके विपरीत, पावर कार्पोरेशन ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 45% और कुल मिलाकर औसतन 28% बढ़ोतरी का प्रस्ताव आयोग को भेजा है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने दावा किया कि परिषद द्वारा प्रस्तुत 90% आंकड़ों को आयोग ने सही माना है, जबकि पावर कार्पोरेशन द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार कराए गए कंसल्टेंट की रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।

मो उवैस खान

मो. उवैस खान KN Live Media Network के फाउंडर और KN LIVE24 में प्रधान संपादक हैं।

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