Crowds gathered at the conclusion of Ramlila: रामलीला मैदान में गुरुवार को अंतिम दिन श्रीराम और रावण के बीच हुए रोमांचक युद्ध को देखने के लिए भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन और पुलिस बल को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
रोमांचक रहा राम-रावण युद्ध
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की वानर सेना तथा रावण की सेना में भयंकर युद्ध हुआ। दोनों ओर से जोरदार प्रहार हुए। युद्ध के दौरान जब रावण की नजर विभीषण पर पड़ी तो उसने सोचा कि कहीं वह नाभि में अमृत होने का भेद श्रीराम को न बता दें। इस पर रावण ने वज्र शक्ति का प्रहार किया, जिसे देखकर श्रीराम ने विभीषण को अपने पीछे कर स्वयं सहन किया।
विभीषण ने बताया रावण वध का रहस्य
विभीषण की आंखें खुल गईं। उन्होंने श्रीराम को बताया कि रावण की नाभि में अमृत है और जब तक इसे खत्म नहीं करेंगे, वह नहीं मरेगा। इसके बाद श्रीराम ने इकतीस बाणों का प्रहार कर रावण का वध किया।

जय श्रीराम के नारों से गूंजा मैदान
रावण के गिरते ही रामलीला मैदान जय श्रीराम के गगनभेदी नारों से गूंजायमान हो गया। चारों तरफ से जय श्रीराम का उद्घोष हो रहा था। देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की।
सराहनीय रही व्यवस्था
कमेटी के संरक्षक पूर्व सांसद प्रतिनिधि राजीव प्रताप सिंह, अध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, अनिल कुमार दुबे, प्रदीप कुमार दुबे, विमल प्रताप सिंह, गुड्डू लाला, सत्य प्रताप सिंह उर्फ टिल्लू भैया, डॉक्टर आरपी सिंह, राजीव गुप्त उर्फ पिंटू गुप्त सहित समस्त कमेटी के पदाधिकारी व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे।
थाना प्रभारी एसओ रिख तथा चौकी इंचार्ज नादेमऊ देवी सहाय वर्मा का भारी भीड़ को नियंत्रित करने में सराहनीय योगदान रहा।











