Big change in outsourcing services in Uttar Pradesh: लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम लिमिटेड’ के गठन को मंजूरी दी गई। इस फैसले को सरकारी नियुक्तियों में व्याप्त अनियमितताओं पर लगाम लगाने और कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सरकार के मुताबिक, यह निगम कंपनी एक्ट-2013 की धारा 8 के तहत एक नॉन-प्रॉफिट संस्था के रूप में पंजीकृत होगा और जेम पोर्टल के माध्यम से सेवाप्रदाता एजेंसियों का चयन करेगा। निगम की यह व्यवस्था राज्यभर में विभिन्न विभागों में हो रही आउटसोर्सिंग नियुक्तियों को मानकीकृत करने का काम करेगी।
आउटसोर्स कर्मचारियों को मिलेगा तय मानदेय और सुरक्षा
निगम के माध्यम से नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को ₹16,000 से ₹20,000 तक मासिक वेतन मिलेगा। साथ ही ईपीएफ और ईएसआई का अंशदान सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाएगा। वेतन हर माह की 1 से 5 तारीख के बीच खातों में ट्रांसफर होगा, जिससे समय पर भुगतान की गारंटी मिलेगी। कर्मचारी माह में 26 दिन सेवा दे सकेंगे।
भर्ती प्रक्रिया होगी पारदर्शी, चयन में परीक्षा व साक्षात्कार अनिवार्य
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों का चयन पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से होगा। इसके लिए लिखित परीक्षा और साक्षात्कार का प्रावधान रखा गया है, जिससे योग्य और दक्ष अभ्यर्थियों का चयन सुनिश्चित किया जा सके। भर्ती से पहले प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
आरक्षण और महिला अधिकारों का भी रखा गया ध्यान
नई व्यवस्था में एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांगजन, पूर्व सैनिक और महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिलेगा। महिलाओं को मातृत्व अवकाश की सुविधा भी दी जाएगी, जो अब तक आउटसोर्स कर्मियों को बहुत कम मिलती थी।
मृत्यु पर मिलेगा अंत्येष्टि सहायता
यदि सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिजनों को ₹15,000 की अंतिम संस्कार सहायता राशि प्रदान की जाएगी। यह प्रावधान कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान
नई प्रणाली में यदि किसी कर्मचारी या एजेंसी की ओर से सेवा में अनियमितता पाई जाती है, तो निगम को सेवा समाप्त करने का अधिकार होगा। सरकार का कहना है कि इससे सिस्टम में जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित होगा।
रोजगार और सुशासन को मिलेगा बल
सरकार के इस फैसले से राज्य में युवाओं को संगठित और सुरक्षित रोजगार के अवसर मिलेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह निर्णय न केवल रोजगार सृजन में मदद करेगा, बल्कि सरकारी सेवाओं में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही भी लाएगा।








