छह सूत्रीय मांगों को लेकर हसेरन कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आशा स्वास्थ्य कर्मियों का आक्रोश फूट पड़ा। लगभग आधा सैकड़ा आशा बहुओं ने उत्तर प्रदेश आशा वर्कर यूनियन के बैनर तले दरी बिछाकर सुबह से शाम तक धरना-प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं जिला उपाध्यक्ष सुमन देवी और हसेरन ब्लॉक अध्यक्ष राधा श्रीवास्तव ने बताया कि आशा कर्मी वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनी हुई हैं, लेकिन आज भी उन्हें उनका हक नहीं मिला। उन्होंने मांग की कि आशा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। यदि यह संभव न हो, तो न्यूनतम 25 हजार रुपये मानदेय, जीवन बीमा, भविष्य निधि और राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों में विश्राम भवन की सुविधा और स्नातक आशा कर्मियों को एएनएम के लिए विभागीय प्रशिक्षण देने की मांग भी उठाई गई।

धरने के दौरान आशा कर्मी कुंती देवी ने आरोप लगाया कि पिछले माह का वाउचर जमा करने सीएचसी पहुंचने पर बीसीपीएम ने समय पर जमा न होने की बात कहते हुए वाउचर फाड़ने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य खराब होने के कारण वह समय से वाउचर जमा नहीं कर सकीं।
वहीं, इस पूरे मामले पर सीएचसी प्रभारी डॉ. जगदीश निर्मल ने सफाई देते हुए कहा कि हड़ताल के दौरान वाउचर जमा नहीं किए जा सकते।
धरना-प्रदर्शन में पुष्पा, नीलम, साधना, रामदेवी, सुमन वर्मा, शबीम बानो, रीता, सुनीता सहित कई आशा स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहीं।











