समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आज़म खां को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। रामपुर के क्वालिटी बार पर कथित अवैध कब्जे से जुड़े मामले में उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली गई है। यह एक हफ्ते के भीतर उन्हें मिली तीसरी राहत है।
इससे पहले 10 सितंबर को डूंगरपुर प्रकरण में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी और 16 सितंबर को रामपुर की अदालत ने अवमानना मामले में बरी कर दिया था। अब लगभग सभी मुकदमों में उन्हें जमानत मिल चुकी है, जिससे उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
आजम खां ने एमपी-एमएलए कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी ओर से अधिवक्ता इमरानउल्लाह ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक द्वेष का परिणाम है। एफआईआर वर्ष 2019 में दर्ज हुई थी, लेकिन उन्हें आरोपी 2024 में बनाया गया। दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा कि आज़म खां का आपराधिक इतिहास रहा है और मंत्री रहते हुए उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया।
मामला सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में सईद नगर हरदोई पट्टी स्थित क्वालिटी बार से जुड़ा है। राजस्व निरीक्षक अनंगराज सिंह ने 2019 में एफआईआर दर्ज कराई थी। पहले इस प्रकरण में सैयद जफर अली जाफरी, डॉ. तजीन फातिमा और अब्दुल्ला आज़म का नाम शामिल था। बाद में विवेचना में आज़म खां को भी आरोपी बनाया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति समीर जैन की बेंच ने फैसला सुनाया और जमानत मंजूर कर दी। अधिवक्ता इमरानउल्लाह के अनुसार अब सभी मामलों में आज़म खां को जमानत मिल चुकी है और जल्द ही उनकी रिहाई की संभावना है।











