नेपाल की राजनीति में चल रहा उथल-पुथल अब गंभीर संकट का रूप ले चुका है। जन-जन आंदोलन के दबाव के बीच ओली सरकार के सामने स्थिति बिगड़ती जा रही है। बीते 48 घंटों में तीन प्रमुख मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है, वहीं सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी नेपाली कांग्रेस भी सरकार से दूरी बनाने की तैयारी में है।
तीन मंत्रियों का इस्तीफा
गृह मंत्री रमेश लेखक, कृषि एवं पशुपालन मंत्री रामनाथ अधिकारी और स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मंत्रियों ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों से भटककर दमनकारी नीतियां अपना रही है। कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी ने इस्तीफे में लिखा, “सरकार लोकतंत्र की रक्षा करने के बजाय सत्ता बचाने में लगी है। नागरिकों के अधिकारों का दमन मेरे सिद्धांतों के खिलाफ है।”
पीएम ओली से इस्तीफे की मांग
नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग की है। उनका कहना है कि Gen-Z आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में निर्दोष युवाओं की मौत के लिए प्रधानमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस जल्द ही इस मुद्दे पर अपनी कार्यकारिणी बैठक में सरकार से समर्थन वापस लेने पर विचार करेगी। सूत्रों के मुताबिक, इस बीच पीएम ओली स्वास्थ्य कारणों से दुबई जाने की तैयारी में हैं।
20 लोगों की मौत से बढ़ा संकट
8 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों और पुलिस गोलीबारी में करीब 20 लोगों की मौत और सैकड़ों घायल हो गए थे। इस घटना ने जनता के आक्रोश को और बढ़ा दिया है। अब सहयोगी दलों और मंत्रियों के इस्तीफे से सरकार पर संकट और गहरा गया है।
आगे क्या?
अब सबसे बड़े सवाल यही हैं—क्या ओली सरकार बचेगी? क्या प्रधानमंत्री इस्तीफा देंगे? क्या नेपाली कांग्रेस समर्थन वापस लेगी? और क्या नेपाल जल्द ही मध्यावधि चुनाव की ओर बढ़ेगा? आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति की दिशा इन्हीं सवालों से तय होगी।










