People of Kannauj suffer the consequences of water drainage: इत्र नगरी के नाम से मशहूर कन्नौज के कुछ इलाकों में जल निकासी की वर्षों पुरानी समस्या अब जनजीवन के लिए गंभीर संकट बन चुकी है। तिर्वा क्रॉसिंग के पास रेल लाइन के दूसरी ओर बसे मोहल्लों में बारिश शुरू होते ही हालत बद से बदतर हो जाते हैं। महज कुछ मिनटों की बारिश इस इलाके को तालाब में तब्दील कर देती है।

स्थिति यह है कि बारिश रुकने के बाद भी कई दिनों तक जलजमाव बना रहता है। इलाके के लोग पानी में घुटनों तक उतरकर अपने जरूरी काम निपटाने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि यह समस्या एक-दो साल की नहीं, बल्कि दशकों पुरानी है।
हजारों की आबादी परेशान, समाधान अब तक नहीं
तिर्वा क्रॉसिंग के इर्द-गिर्द हजारों की आबादी निवास करती है, लेकिन जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण यह पूरा क्षेत्र बारिश में पानी-पानी हो जाता है। जलभराव इतना गंभीर होता है कि घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। लोगों का कहना है कि वे हर बारिश के मौसम में घरों में कैद हो जाते हैं।
स्थानीय निवासी राजेश कुमार ने बताया, “बारिश चाहे एक घंटे की हो या दस मिनट की, हमारे मोहल्ले की सूरत कुछ ही देर में तालाब जैसी हो जाती है। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
प्रशासनिक उपेक्षा पर उठे सवाल
चौंकाने वाली बात यह है कि जिस इलाके की यह हालत है, वहीं पास में डीएम कार्यालय, विकास भवन और राज्य सरकार में मंत्री असीम अरुण का आवास भी है। इसके बावजूद जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इस समस्या को उठाया गया, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिले।
जनता में गहरी नाराजगी, सवालों के घेरे में विकास के दावे
सरकार द्वारा नगर विकास और स्मार्ट सिटी जैसे तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन तिर्वा क्रॉसिंग जैसे इलाके सरकार की जमीनी हकीकत को उजागर करते हैं। लोग अब इस जलभराव को अपना मुकद्दर मानकर जीने को मजबूर हो गए हैं।
एक अन्य निवासी शबाना बेगम कहती हैं, “बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, बुजुर्गों का बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता है। बीमारी का खतरा अलग से बना रहता है। क्या हम विकास से बाहर हैं?”
क्या मिलेगा स्थायी समाधान?
प्रशासन और स्थानीय निकायों की निष्क्रियता के चलते इस इलाके की जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। सवाल यह है कि जब शासन और प्रशासनिक तंत्र के शीर्ष अधिकारी इसी क्षेत्र में रहते हैं, तब भी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा?
अब देखना होगा कि कन्नौज के तिर्वा क्रॉसिंग की ये तस्वीर कब बदलेगी और यहां की जनता को कब मिलेगी जलभराव से स्थायी राहत।
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