उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक है और संभावित उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चर्चा में आए नामों में आरएसएस से जुड़े शेषाद्रिचारी और हरियाणा के आचार्य देवव्रत प्रमुख हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पद के लिए किसी बड़े केंद्रीय मंत्री को नामित कर सकते हैं, जिससे सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव है।फिलहाल गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, इससे पहले हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके हैं और जाट समुदाय से आते हैं।
जाट समाज का प्रभाव हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब के कुछ हिस्सों में मजबूत माना जाता है। शिक्षा और सामाजिक कार्यों में लंबे समय से सक्रिय देवव्रत गुरुकुल के प्राचार्य भी रह चुके हैं।बीजेपी के लिए यह चुनाव महज एक संवैधानिक पद भरने का मौका नहीं है, बल्कि इसके जरिए पार्टी जातीय और सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति पर काम कर रही है। चर्चा है कि दक्षिण भारत से आने वाले किसी केंद्रीय मंत्री को भी इस पद के लिए चुना जा सकता है, जैसा कि वैंकेया नायडू के समय हुआ था।
एनडीए की स्थिति को देखते हुए उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में उनके पास बहुमत से ज्यादा संख्या बल है। माना जा रहा है कि इसी हफ्ते बीजेपी अपने उम्मीदवार का ऐलान करेगी, जिसके बाद विपक्षी INDIA गठबंधन भी अपना नाम तय करेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस पद के लिए साझा उम्मीदवार पर सहमति बनाने की कोशिशों में जुटे हैं।













