UP Politics News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन स्तर पर बड़े बदलावों का ऐलान किया है। पार्टी प्रमुख मायावती ने साफ किया है कि अब संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत किया जाएगा और इसमें युवाओं की अहम भूमिका होगी। नए ढांचे में लगभग आधी भागीदारी युवाओं की सुनिश्चित की जाएगी।
इस रणनीति के तहत बसपा ने कई पुराने पदों को खत्म करते हुए संगठन को बूथ और सेक्टर स्तर पर फिर से खड़ा करने का फैसला लिया है। जिला प्रभारियों के पद समाप्त कर दिए गए हैं और उनकी जगह विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। मायावती ने सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तेजी से बूथ और सेक्टर कमेटियों का गठन करें।
चुनाव आयोग की नई व्यवस्था के बाद प्रदेश में बूथों की संख्या बढ़ गई है। पहले जहां करीब 1.62 लाख बूथ थे, अब यह संख्या बढ़कर लगभग 1.77 लाख हो गई है। ऐसे में करीब 15 हजार नए बूथ ऐसे हैं, जहां संगठन मौजूद नहीं है। इसी कमी को पूरा करने के लिए पार्टी ने दोबारा बूथ और सेक्टर गठन का फैसला लिया है। जिलाध्यक्षों और मंडल प्रभारियों को रोजाना कम से कम चार बूथ तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। अनुमान है कि यह काम करीब तीन महीने में पूरा हो जाएगा।
नई व्यवस्था के अनुसार, प्रत्येक सेक्टर में 10 बूथ होंगे और सेक्टरों को भी दो हिस्सों में बांटा जाएगा, ताकि निगरानी और संचालन ज्यादा प्रभावी हो सके। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इससे संगठन चुनाव के लिए ज्यादा सक्रिय और मजबूत बनेगा।
इसके साथ ही मायावती ने पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती 15 मार्च को लखनऊ और नोएडा में भव्य रूप से मनाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, 14 अप्रैल को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती भी बड़े स्तर पर आयोजित की जाएगी। इन कार्यक्रमों में लखनऊ के 12 मंडलों और नोएडा के 6 मंडलों के कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल होंगे।
बूथ और सेक्टर स्तर का गठन पूरा होने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता — जिनमें राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद, राष्ट्रीय महामंत्री सतीश चंद्र मिश्र, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल और अन्य प्रमुख चेहरे शामिल हैं — जिलों में जाकर जनसंपर्क और संगठनात्मक कार्यक्रम करेंगे।
मायावती का कहना है कि पार्टी का लक्ष्य अगले चुनाव में फिर से सत्ता में वापसी करना है। गौरतलब है कि 2007 में बसपा ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई थी, लेकिन उसके बाद पार्टी का प्रदर्शन कमजोर होता गया। फिलहाल विधानसभा में बसपा का सिर्फ एक विधायक है और पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी कोई सीट नहीं जीत पाई थी।













