उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नाबालिग से जुड़े गैंगरेप मामले में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान को अदालत से राहत मिलने के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
जिया उर रहमान बर्क का कहना है कि सरकार कानून की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही किसी को दोषी मानकर कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले ने सच्चाई सामने ला दी है। हालांकि वे न्यायपालिका के निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों ने मोईद खान की संपत्ति पर बुलडोजर चलाने का आदेश दिया था, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
दूसरी ओर, भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रदेश सरकार अपराध को लेकर सख्त नीति अपनाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ऐसे मामलों में आरोपियों का समर्थन करती रही है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 29 जुलाई 2024 का है, जब भदरसा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ गैंगरेप की शिकायत दर्ज कराई गई थी। पीड़िता के गर्भवती होने के बाद मोईद खान और उनके नौकर राजू खान के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ। मोईद खान सपा के पूर्व नगर अध्यक्ष रह चुके हैं और सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी बताए जाते हैं, जिससे मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया।
मामला सामने आने के बाद योगी सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मोईद खान की बेकरी और खान कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चलवाया, उन्हें जेल भेजा गया और गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया। इस कदम का समाजवादी पार्टी ने खुलकर विरोध किया था।
अदालत में सुनवाई के दौरान कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, लेकिन मोईद खान के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं हो सका। डीएनए जांच में भी उनका मिलान नहीं हुआ, जिसके आधार पर कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। वहीं, सह-आरोपी राजू खान का डीएनए मैच पाया गया है और उसे सजा सुनाए जाने पर अदालत जल्द फैसला करेगी।
कोर्ट के फैसले के बाद सपा ने एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए इसे मनमाना कदम बताया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई है।











