नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध तेज होता जा रहा है। इस मुद्दे पर अब मशहूर कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक कविता साझा करते हुए UGC के प्रस्तावित नियमों पर आपत्ति जताई और इन्हें वापस लेने की मांग की।
कुमार विश्वास ने अपनी पोस्ट में दिवंगत कवि रमेश रंजन की एक कविता की पंक्तियां साझा कीं, जिनके माध्यम से उन्होंने सामान्य वर्ग के छात्रों की पीड़ा और असंतोष को अभिव्यक्त किया। इस पोस्ट के साथ उन्होंने #UGC_RollBack हैशटैग का भी इस्तेमाल किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया।
UGC के नए नियमों का उद्देश्य और विवाद
UGC द्वारा प्रस्तावित ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ का मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना बताया गया है। यह पहल सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद सामने आई है, जिसमें शिक्षण संस्थानों में भेदभाव समाप्त करने के लिए ठोस व्यवस्था बनाने को कहा गया था।
इन नियमों के तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समानता समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है। इन समितियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों को शामिल करना जरूरी होगा, ताकि छात्र भेदभाव से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकें। पहली बार OBC छात्रों को भी इस दायरे में लाया गया है।
हालांकि, विरोध करने वालों का कहना है कि इन नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों के प्रतिनिधित्व का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। साथ ही, उनका यह भी तर्क है कि यदि कोई शिकायत झूठी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई से जुड़े नियम कमजोर कर दिए गए हैं, जिससे एकतरफा व्यवस्था बन सकती है।
प्रदर्शन और मांगें
UGC नियमों के विरोध में छात्र संगठनों और समर्थकों ने कई मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि किसी भी जाति या वर्ग के छात्र के साथ भेदभाव होने पर समान रूप से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा, झूठी शिकायत दर्ज कराने वालों के खिलाफ दंड का प्रावधान और सभी छात्रों के लिए समान न्याय व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।
दिल्ली, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु समेत कई बड़े शहरों में विश्वविद्यालय परिसरों में धरना-प्रदर्शन, मार्च और सभाएं आयोजित की जा रही हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि नियमों में संतुलन नहीं रखा गया, तो इसका विरोध सड़कों से लेकर संसद तक किया जाएगा। वहीं, कुमार विश्वास सहित कई सामाजिक हस्तियों का मानना है कि समानता और न्याय के साथ-साथ सभी वर्गों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी नियम को लागू करने से पहले व्यापक संवाद जरूरी है।











