उत्तर प्रदेश के बरेली में तैनात रहे सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के दावे और उनके बयानों ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों से जुड़े विवाद के बीच अग्निहोत्री ने राज्य में ब्राह्मण समाज के प्रति कथित भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
अग्निहोत्री का कहना है कि हाल के महीनों में ब्राह्मण समाज से जुड़े व्यक्तियों के साथ हुई कुछ घटनाएं चिंता पैदा करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग स्थानों पर मारपीट और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें पुलिस थाने और जेल से जुड़े मामले भी शामिल बताए जा रहे हैं। उनका दावा है कि इन घटनाओं से समाज में गलत संदेश जा रहा है।
उन्होंने मौनी अमावस्या के दिन माघ मेला से जुड़े एक प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ आए साधु-संतों और शिष्यों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार हुआ। अग्निहोत्री ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी तंत्र की कार्रवाई से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
अपने इस्तीफे को लेकर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उन्हें पद से हटाने और किसी अन्य मामले में निलंबन की तैयारी की जा रही थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिला प्रशासन के कार्यालय में हुई एक फोन बातचीत उन्होंने सुन ली थी, जिसके बाद वकील को सूचना देने पर ही उन्हें वहां से जाने दिया गया। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने किसी तरह की साजिश या बंधक बनाए जाने के आरोपों से इनकार किया है।
UGC के नए नियमों पर टिप्पणी करते हुए अग्निहोत्री ने 13 जनवरी 2026 को जारी भारत सरकार के राजपत्र का हवाला दिया। उनका आरोप है कि इन नियमों से विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय की आशंका बढ़ेगी और झूठी शिकायतों के आधार पर उत्पीड़न का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव सामान्य और ब्राह्मण समाज पर अधिक पड़ सकता है।
अंत में, अग्निहोत्री ने ब्राह्मण समाज से जुड़े सांसदों और विधायकों से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की और चेतावनी दी कि यदि समय रहते आवाज नहीं उठाई गई, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।











